अब SIR का काम नहीं होगा तुम..., BLO's के लिए चुनावी ड्यूटी बनी यमदूत! अब तक 8 की मौत
Daily News Mirror| SIR News
अहमदाबाद, 21 नवंबर 2025 (न्यूज डेस्क): गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के कोडीनार तालुका के छारा गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। सरकारी स्कूल में शिक्षक और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में तैनात अरविंद वाढ़ेर (उम्र 42 वर्ष) ने गुरुवार शाम अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उनके पास मिले सुसाइड नोट में उन्होंने स्पष्ट रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े काम के अत्यधिक दबाव को अपनी मौत का कारण बताया है। नोट में लिखा था, "मुझसे अब SIR का काम नहीं होगा... तुम अपना काम देखो, मैं थक गया हूं।" यह घटना देशभर में BLOs पर बढ़ते वर्कलोड के खिलाफ उठ रही चिंताओं को और गहरा करती है, जहां अब तक आठ BLOs की मौतें दर्ज हो चुकी हैं।
परिवार के सदस्यों के अनुसार, अरविंद पिछले दो हफ्तों से SIR ड्यूटी के कारण मानसिक रूप से टूट चुके थे। वे दिन भर स्कूल की पढ़ाई संभालते, उसके बाद शाम से रात तक घर-घर जाकर फॉर्म बांटते और डेटा एंट्री करते। "वह रात के 2 बजे तक जागते रहते। मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण कई बार गांव से बाहर जाकर काम पूरा करते। दबाव इतना था कि खाना-पीना भी भूल जाते," उनकी पत्नी ने रोते हुए बताया। स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन परिवार ने प्रशासन पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
यह अरविंद की मौत गुजरात में SIR से जुड़ी दूसरी बड़ी घटना है। मात्र एक दिन पहले, 20 नवंबर को खेड़ा जिले के कपड़वंज तालुका के जम्बूड़ी गांव के निवासी रमेशभाई परमार (उम्र 50 वर्ष) की हार्ट अटैक से मौत हो गई। रमेशभाई भी एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल थे और हाल ही में BLO की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। परिवार का दावा है कि SIR के काम के कारण उन्हें रोजाना 94 किलोमीटर बाइक से यात्रा करनी पड़ती थी, जो उनकी सेहत के लिए घातक साबित हुई। उनकी बेटी शिल्पा ने कहा, "पापा दबाव में थे। रात को भी डेटा एंट्री के लिए जागते रहते। डॉक्टरों ने हार्ट अटैक को वर्क स्ट्रेस से जोड़ा है।"
SIR प्रक्रिया: शिक्षकों पर दोहरी जिम्मेदारी का बोझ
चुनाव आयोग द्वारा अक्टूबर में शुरू की गई SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अपडेट करना है, जो 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है। गुजरात में करीब 5 करोड़ वोटरों को कवर करने के लिए 90 प्रतिशत BLOs को शिक्षकों से ही चुना गया है। एक BLO को औसतन 700-1,500 वोटरों के घरों में जाकर फॉर्म बांटने, भरवाने और ऑनलाइन अपलोड करने का काम सौंपा गया है। इसमें QR कोड स्कैनिंग, डिजिटल डेटा एंट्री और डेडलाइन (4 दिसंबर तक) का दबाव शामिल है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह प्रक्रिया मूल रूप से तीन साल की होनी थी, लेकिन अब दो महीनों में पूरी करने का आदेश BLOs पर 'अमानवीय दबाव' डाल रहा है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ (गुजरात) के अध्यक्ष ने बताया, "शिक्षक स्कूल के बाद BLO ड्यूटी न करने पर गिरफ्तारी का डर महसूस कर रहे हैं। हमने राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा है कि BLO काम शिक्षकों से हटाया जाए।" संगठन ने शुक्रवार को राज्यव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है।
देशभर में BLO मौतों का सिलसिला: आठवीं मौत ने बढ़ाई चिंता
अरविंद की मौत के साथ ही SIR से जुड़ी आठवीं BLO मौत दर्ज हो गई है। पिछले 16 दिनों में केरल, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों से ऐसी खबरें आ रही हैं।ये आंकड़े आजतक, इंडियन एक्सप्रेस और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर SIR रोकने की मांग की है, दावा किया कि 28 लोग इससे प्रभावित हो चुके हैं। केरल में BLOs ने हड़ताल की, जबकि राजस्थान में कैंडल मार्च निकाले गए।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: कांग्रेस का BJP पर हमला
गुजरात कांग्रेस ने घटना पर तीखा प्रहार किया। प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा, "शिक्षकों को गुलामी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। BJP सरकार SIR को स्थगित करे।" कांग्रेस प्रवक्ता मनीष डोशी ने 'पराख सर्वे' का हवाला देते हुए कहा कि गुजरात शिक्षा में निचले 10 राज्यों में है, फिर भी 90% BLO ड्यूटी शिक्षकों पर। उन्होंने X पर पोस्ट कर पूछा, "जिम्मेदार कौन?" दूसरी ओर, BJP ने संवेदना जताई लेकिन दबाव से इनकार किया। शिक्षा मंत्री प्रदीपसिंह वालमे ने कहा, "हम जांच कराएंगे। BLOs को अतिरिक्त भत्ता दिया जा रहा है।" गिर सोमनाथ में मंत्री प्रदीप वाजा का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया, क्योंकि स्थानीय स्तर पर आक्रोश भड़क उठा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
चुनाव आयोग का दावा है कि SIR से वोटर लिस्ट सटीक बनेगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल टूल्स की कमी और ट्रेनिंग के अभाव ने BLOs को परेशान किया है। मनोचिकित्सक डॉ. रवि शाह ने कहा, "मानसिक तनाव से हार्ट अटैक और डिप्रेशन आम है। BLOs को काउंसलिंग और सहायक स्टाफ की जरूरत है।"
शिक्षक संगठन मुआवजे और SIR स्थगित करने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल, गुजरात में 99% फॉर्म बांट चुके हैं, लेकिन जमा होने की दर मात्र 15% है। यह विवाद आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को प्रभावित कर सकता है।
अरविंद की मौत ने न सिर्फ गुजरात, बल्कि पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है—क्या लोकतंत्र की मजबूती के नाम पर कर्मचारियों की जान जोखिम में डाली जा सकती है? जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन तब तक कई परिवारों का दर्द कम होने वाला नहीं।
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