भारत का गौरव अंतरिक्ष में: शुभांशु शुक्ला ने रचा इतिहास, लखनऊ से अंतरिक्ष तक का प्रेरणादायक सफर
नई दिल्ली, 26 जून 2025: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष की दुनिया में भारत का परचम लहराते हुए इतिहास रच दिया है। वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। 25 जून 2025 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट और ड्रैगन अंतरिक्ष यान के जरिए शुरू हुई उनकी यह ऐतिहासिक यात्रा 41 साल बाद भारत के लिए एक गर्व का क्षण लेकर आई है। इससे पहले 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा ने सोवियत संघ के सोयूज टी-11 मिशन के तहत अंतरिक्ष की यात्रा की थी।
लखनऊ से अंतरिक्ष तक का प्रेरणादायक सफर
10 अक्टूबर 1985 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जन्मे शुभांशु शुक्ला की कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, मात्र 16 वर्ष की आयु में उनका चयन राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के लिए हुआ। 2005 में NDA से कंप्यूटर साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद, शुभांशु ने भारतीय वायुसेना में बतौर फाइटर पायलट अपने करियर की शुरुआत की। Su-30 MKI, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर 228 और एएन-32 जैसे विमानों को उड़ाने का 2,000 घंटे से अधिक का अनुभव उनके खाते में है। इसके अलावा, उन्होंने बेंगलुरु के भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री भी हासिल की।
1999 के कारगिल युद्ध ने शुभांशु को देश सेवा के लिए प्रेरित किया। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के गगनयान मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक बनाया। 2019 में इसरो के अंतरिक्ष यात्री चयन प्रक्रिया में चुने गए शुभांशु को 2024 में ग्रुप कैप्टन के पद पर पदोन्नत किया गया।
एक्सिओम-4 मिशन: भारत की अंतरिक्ष यात्रा में नया अध्याय
शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 (Ax-4) मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा पर हैं। यह मिशन नासा, एक्सिओम स्पेस और स्पेसएक्स के सहयोग से संचालित एक निजी वाणिज्यिक अंतरिक्ष अभियान है। शुभांशु इस मिशन के पायलट हैं, जबकि मिशन की कमान अमेरिका की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन के हाथों में है। उनके साथ पोलैंड के स्लावोज उज्नांस्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू भी मिशन विशेषज्ञ के रूप में शामिल हैं।
25 जून 2025 को भारतीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे फाल्कन-9 रॉकेट ने कैनेडी स्पेस सेंटर के लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से उड़ान भरी। लगभग 26 घंटे की यात्रा के बाद, ड्रैगन अंतरिक्ष यान ने 26 जून को शाम 4:03 बजे ISS के साथ सफलतापूर्वक डॉकिंग की। यह डॉकिंग प्रक्रिया, जिसमें अंतरिक्ष यान और स्टेशन के बीच सटीक गति और स्थिति का मिलान किया जाता है, मिशन का एक जटिल और महत्वपूर्ण हिस्सा थी।
14 दिन का वैज्ञानिक अभियान
शुभांशु और उनकी टीम 14 दिनों तक ISS पर रहकर 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे, जिनमें सात भारतीय प्रयोग शामिल हैं। इनमें टार्डिग्रेड्स (सूक्ष्म जीव) के पुनरुत्थान, प्रजनन और अस्तित्व का अध्ययन और अंतरिक्ष में फसल उगाने जैसे प्रयोग शामिल हैं। ये प्रयोग न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान को बढ़ावा देंगे, बल्कि पृथ्वी पर जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी नए रास्ते खोल सकते हैं। शुभांशु के इस मिशन का अनुभव इसरो के महत्वाकांक्षी ग gनयान मिशन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा, जिसे 2027 तक लॉन्च करने की योजना है।
लेखक: शक्ति तिवारी
स्रोत: विभिन्न समाचार वेबसाइट्स और सोशल मीडिया अपडेट्स
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