फतेहपुर ट्रिपल मर्डर: वर्चस्व की जंग में खून से रंगा अखरी गांव, एक ही परिवार के 3 लोगों को गोलियों से भूना
पुरानी रंजिश और प्रधानी चुनाव को लेकर वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा
फतेहपुर, 09 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के हथगांव थाना क्षेत्र में स्थित अखरी गांव मंगलवार सुबह एक दिल दहला देने वाले तिहरे हत्याकांड का गवाह बना। इस सनसनीखेज वारदात में एक ही परिवार के तीन लोगों—किसान नेता विनोद सिंह उर्फ पप्पू (50), उनके बेटे अभय सिंह (22) और भाई अनूप सिंह उर्फ रिंकू (40)—की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। प्रारंभिक जांच में यह हत्याकांड पुरानी रंजिश और प्रधानी चुनाव को लेकर वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा बताया जा रहा है। इस घटना ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया है, वहीं पुलिस और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है।
हत्याकांड की कहानी: कैसे हुआ खूनी खेल?
घटना मंगलवार सुबह करीब 7:30 बजे की है, जब पप्पू सिंह अपने बेटे अभय और भाई रिंकू के साथ बाइक से ताहिरापुर चौराहे की ओर जा रहे थे। इसी दौरान ट्रैक्टर पर सवार हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने तीनों को दौड़ा-दौड़ा कर गोलियों से छलनी कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक पप्पू सिंह की मां रामदुलारी वर्तमान में अखरी गांव की प्रधान हैं, जबकि मुख्य आरोपी सुरेश सिंह उर्फ मुन्नू गांव का पूर्व प्रधान बताया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी और रास्ते को लेकर विवाद इस हत्याकांड की वजह बने।
घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल फैल गया। गुस्साए ग्रामीणों ने शवों को उठाने से रोक दिया और पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनकी मांग थी कि आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उनका एनकाउंटर किया जाए। हालात को काबू में करने के लिए कई थानों की पुलिस और पीएसी को तैनात करना पड़ा।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: मुठभेड़ और गिरफ्तारी
हत्याकांड के 18 घंटे के भीतर ही पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों—पीयूष सिंह और सज्जन सिंह—को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। यह मुठभेड़ बुधवार तड़के खागा कोतवाली क्षेत्र के प्रेमनगर-बुधवन मार्ग पर बरकतपुर के पास हुई। पुलिस अधीक्षक धवल जायसवाल के अनुसार, एक काली स्कॉर्पियो में सवार दोनों आरोपी पुलिस को देखकर भागने की कोशिश कर रहे थे। घेराबंदी के दौरान आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। इस मुठभेड़ में दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी और उन्हें घायल अवस्था में गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मौके से पुलिस ने दो तमंचे, तीन खोखा कारतूस, एक जिंदा कारतूस, एक स्कॉर्पियो गाड़ी, दो मोबाइल फोन और 1700 रुपये नकद बरामद किए। इससे पहले मंगलवार को ही मुख्य आरोपी सुरेश सिंह उर्फ मुन्नू और एक अन्य आरोपी भूपेंद्र को गिरफ्तार किया जा चुका था। इस तरह, अब तक इस मामले में कुल चार आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है, जबकि दो अन्य फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।
बुलडोजर एक्शन: प्रशासन का सख्त रुख
हत्याकांड के बाद ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। बुधवार को मुख्य आरोपी सुरेश सिंह की बेटी के नाम पर सरकारी जमीन पर बने एक अवैध निर्माण को जिला प्रशासन ने ढहा दिया। इस कार्रवाई के दौरान डीएम, एसपी और भारी पुलिस बल मौजूद रहा। सूत्रों के अनुसार, मुन्नू सिंह द्वारा प्रधानी के दौरान अवैध तरीके से अर्जित की गई संपत्तियों की भी जांच की जा रही है, और आगे भी इस तरह की कार्रवाई जारी रह सकती है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस घटना ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया पर सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा, "फतेहपुर हत्याकांड ने साबित कर दिया कि प्रदेश में जंगलराज कायम है। सरकार को अपराधियों पर सख्ती से लगाम लगानी चाहिए।" वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हत्याकांड ने गांव में जातीय और राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है।
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