वाराणसी: खेल-खेल में कनेर का फल खाने से दो बहनों समेत तीन मासूम बच्चियों की मौत, गांव में मातम का माहौल
Daily News Mirror/ Varanasi News
वाराणसी, 6 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के करधना गांव में एक हृदय विदारक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। रविवार दोपहर (4 जनवरी 2026) खेलते समय तीन मासूम बच्चियों ने कनेर (नेरियम ओलियंडर) के जहरीले फल को आंवला समझकर खा लिया, जिससे उनकी मौत हो गई। मृत बच्चियों में दो सगी बहनें हर्षिता (6 वर्ष) और अंशिका (3 वर्ष) शामिल हैं, जबकि तीसरी बच्ची पड़ोस की नैंसी (4 वर्ष) थी।
घटना के अनुसार, पांच बच्चियां घर के बाहर पोखरे के किनारे खेल रही थीं। वहां आंवले का पेड़ था, जिसके बगल में कनेर का पेड़ लगा हुआ था। गिरे हुए फलों को देखकर बच्चियों ने उन्हें आंवला समझा और खा लिया। कुछ देर बाद उन्हें उल्टियां और पेट दर्द शुरू हो गया। परिजनों ने तुरंत उन्हें स्थानीय अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन दो बहनों हर्षिता और अंशिका की रास्ते में ही मौत हो गई। परिजनों ने बिना पुलिस को सूचित किए उनके शवों को गंगा में प्रवाहित कर दिया। वहीं, नैंसी को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान सोमवार को उसकी भी मौत हो गई।
पुलिस जांच में डीसीपी गोमती जोन आकाश पटेल ने पुष्टि की कि मौत कनेर के जहरीले फल से हुई है। उन्होंने कहा, "कोई फाउल प्ले नहीं पाया गया। बच्चियां अनजाने में फल खा बैठीं। अन्य दो बच्चियों की जांच में कोई विषाक्तता नहीं मिली।"
घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। गुस्साए ग्रामीणों ने कनेर के पेड़ को काट दिया। दो बेटियों को खोने वाली मां मनीषा प्रजापति का रो-रोकर बुरा हाल है। नैंसी के पिता बेंगलुरु में प्राइवेट ड्राइवर हैं और बेटी की मौत की खबर मिलते ही फ्लाइट से वाराणसी के लिए रवाना हो गए। दोनों परिवारों के घरों की दूरी महज 50 मीटर है।
कनेर का पौधा आमतौर पर बगीचों और सड़कों के किनारे लगाया जाता है, लेकिन इसका हर हिस्सा - फूल, पत्तियां, फल और बीज - अत्यधिक विषैला होता है। इसमें कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स जैसे जहर होते हैं, जो हृदय की धड़कन को प्रभावित करते हैं और छोटी मात्रा में भी जानलेवा साबित हो सकते हैं, खासकर बच्चों के लिए। विशेषज्ञों के अनुसार, एक फल या पत्ता भी घातक हो सकता है।
इस घटना ने अभिभावकों को सतर्क किया है कि बच्चों को ऐसे पौधों से दूर रखें और जागरूकता फैलाएं।पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर ली है और कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया। यह घटना दुर्घटना के रूप में दर्ज की गई है। स्थानीय प्रशासन ने गांव में जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई है।
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