वाराणसी में दारोगा और सिपाही रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार: 50 हजार की मांग, 20 हजार में पकड़े गए

Jan 29, 2026 - 19:13
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वाराणसी में दारोगा और सिपाही रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार: 50 हजार की मांग, 20 हजार में पकड़े गए
ACB टीम ने रंगे हाथों दरोगा और सिपाही को दबोचा

Daily News Mirror| Varanasi News

वाराणसी, 29 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में भ्रष्टाचार निरोधक टीम ने एक सनसनीखेज कार्रवाई में सिगरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत काशी विद्यापीठ चौकी के इंचार्ज दारोगा शिवाकर मिश्रा और सिपाही गौरव कुमार द्विवेदी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मी दहेज उत्पीड़न के एक मामले में आरोपी के नाम को मुकदमे से हटाने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहे थे। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें सिपाही पैसे फेंककर भागने की कोशिश करता नजर आ रहा है।घटना का विवरणभ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एंटी-करप्शन ब्यूरो) की वाराणसी इकाई को सूचना मिली थी कि दारोगा शिवाकर मिश्रा दहेज उत्पीड़न के एक मामले में आरोपी युवक का नाम चार्जशीट से हटाने के लिए 50 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं।

शिकायतकर्ता ने टीम को बताया कि मिश्रा ने अपने करीबी सिपाही गौरव कुमार द्विवेदी के माध्यम से रिश्वत की व्यवस्था की थी। टीम ने जाल बिछाया और शिकायतकर्ता को 20 हजार रुपये देकर सिपाही से संपर्क करने को कहा। जैसे ही सिपाही ने पैसे लिए, एंटी-करप्शन टीम ने छापा मारकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के दौरान सिपाही गौरव कुमार ने घबराहट में रिश्वत की रकम फेंककर भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने उसे दबोच लिया। पूछताछ में सिपाही ने कबूल किया कि वह दारोगा मिश्रा के निर्देश पर ही रिश्वत ले रहा था। टीम ने मौके से रिश्वत की रकम बरामद कर ली और दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

बैकग्राउंड और जांच

यह घटना सिगरा थाना क्षेत्र की काशी विद्यापीठ चौकी में हुई, जहां दरोगा शिवाकर मिश्रा इंचार्ज के पद पर तैनात थे। दहेज उत्पीड़न का मूल मामला कुछ महीने पुराना बताया जा रहा है, जिसमें आरोपी युवक का नाम चार्जशीट में शामिल था। पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर आरोपी से संपर्क कर नाम हटाने की एवज में रिश्वत मांगी। एंटी-करप्शन टीम की यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्टाचार पर सख्ती का हिस्सा मानी जा रही है।

पुलिस विभाग के सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपियों को निलंबित कर दिया गया है और उनकी संपत्ति की जांच भी शुरू हो सकती है। वाराणसी पुलिस आयुक्त ने कहा कि ऐसे मामलों में कोई बख्शा नहीं जाएगा और विभाग में साफ-सफाई की प्रक्रिया जारी रहेगी।सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएंघटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सिपाही की भागने की कोशिश साफ नजर आ रही है।

 कई यूजर्स ने पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ ने एंटी-करप्शन टीम की तारीफ की है। यह घटना वाराणसी में हाल के महीनों में भ्रष्टाचार के खिलाफ दूसरी बड़ी कार्रवाई है, जो पुलिस की छवि पर सवाल खड़े कर रही है।

एंटी-करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि जांच जारी है और यदि अन्य लोग इसमें शामिल पाए गए तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने एक बार फिर साबित किया है कि भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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