महाकुंभ 2025: सनातन आस्था की गंगोत्री, गुरुजी गौतम ऋषि ने करोड़ों श्रद्धालुओं से की सहभागिता की अपील
Daily News Mirror
प्रयागराज| 14 जनवरी 2025| दुर्गा प्रसाद मिश्रा
सनातन धर्म और अध्यात्म के केंद्र, संगम नगरी प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के भव्य और अद्भुत आयोजन को लेकर देशभर में उत्साह का माहौल है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, ऋषि शिरोमणि और अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौशाला अनुसंधान संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरुजी गौतम ऋषि ने इस आयोजन पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए करोड़ों श्रद्धालुओं और सनातन अनुयायियों से महाकुंभ में शामिल होने की अपील की।
गुरुजी ने कहा, “महाकुंभ सनातन आस्था की गंगोत्री है। बहुत ही सौभाग्यशाली होते हैं वे लोग जिन्हें इसमें आस्था की डुबकी लगाने का अवसर मिलता है। यह अवसर हर व्यक्ति के जीवन को धन्य करने वाला होता है। सभी सनातनी अनुयायियों को महाकुंभ में आकर अपनी आस्था की डुबकी लगानी चाहिए और धर्म का हिस्सा बनना चाहिए।” आगे उन्होंने यह भी कहा कि शायद मनुष्य अपने जीवन भर में भी इतने संतों का आशीर्वाद प्राप्त नहीं कर सकता। लेकिन महाकुम्भ में ये पुनीत अवसर मिलता है जब आप एकसाथ ही देश के सभी संतों का आशीर्वाद ग्रहण कर लेते हैं। और ये कुंभ और भी अति महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 144 वर्षों के बाद आता है तो शायद हम सभी लोग सौभाग्यशाली हैं कि हमें इसमें आस्था की डुबकी लगाने का अवसर मिला है।
उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना
महाकुंभ के आयोजन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे भव्य प्रबंधों की सराहना करते हुए गुरुजी ने कहा, “उत्तर प्रदेश की सरकार राम राज्य की दिशा में प्रगतिशील है। जिस भव्यता के साथ प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है, वह राज्य सरकार के धर्म और आस्था के प्रति सम्मान और समर्पण को दर्शाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एक संत, महात्मा और सनातन धर्म के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित व्यक्ति हैं। उनके कार्यों और योजनाओं में यह आस्था स्पष्ट झलकती है।”
महाकुंभ का महत्व और सनातन में इसकी महत्ता
महाकुंभ सनातन परंपरा का सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो हर 12 वर्ष में आयोजित होता है। लेकिन यह पूर्ण महाकुंभ है जोकि 144 वर्षों के बाद आता है। इसे आस्था, धर्म और मानवता का संगम कहा जाता है। मान्यता है कि महाकुंभ में संगम के जल में स्नान करने से पापों का नाश होता है और आत्मा शुद्ध होती है।
महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाना केवल धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि यह मनुष्य को उसके भीतर की आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का एक माध्यम है। यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक समरसता का अद्वितीय उदाहरण है।
भव्यता के लिए विशेष तैयारियां
उत्तर प्रदेश सरकार महाकुंभ को ऐतिहासिक बनाने के लिए विशेष तैयारियों में जुटी है। आधुनिक सुविधाओं, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा के इंतजामों पर ध्यान दिया जा रहा है ताकि श्रद्धालु सहजता और शांति से आयोजन में भाग ले सकें।
गुरुजी गौतम ऋषि ने सभी श्रद्धालुओं से निवेदन किया कि वे इस पवित्र आयोजन में सम्मिलित होकर धर्म का हिस्सा बनें और सनातन धर्म की इस महान परंपरा को और मजबूत करें।।
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