मेरठ के बाद प्रयागराज में नीले ड्रम का रहस्य! जमीन खोदी तो निकला नोटों का खजाना, करोड़ों की बरामदगी से हड़कंप
Daily News Mirror| Prayagraj News
प्रयागराज: मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड के बाद अब प्रयागराज में नीले ड्रमों से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। यहां एक मकान के अंदर जमीन खोदकर निकाले गए तीन नीले ड्रमों में 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी मिलीं। शुरुआती रिपोर्टों में करोड़ों रुपये की नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, कुल रकम कितनी है और उसका स्रोत क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
जमीन के नीचे दबे थे तीन नीले ड्रम, पुलिस भी रह गई हैरान
यह मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के बरईपुर रामनगर गांव का है। बुधवार, 28 अक्टूबर की देर शाम पुलिस टीम एक मकान पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया।
मकान के अंदर संदिग्ध स्थान पर खुदाई कराई गई तो जमीन में दबे तीन नीले प्लास्टिक के ड्रम बरामद हुए। जब ड्रमों को खोलकर देखा गया तो उनमें 500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी मिलीं। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने की सूचना फैलते ही गांव में हड़कंप मच गया।
मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी पहुंचे। नकदी की गिनती के लिए मशीनों की व्यवस्था किए जाने की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शुरुआती गिनती में करोड़ों रुपये की रकम सामने आई, जबकि कुल बरामदगी को लेकर इससे कहीं बड़े दावे भी किए जा रहे हैं।
आखिर कितनी है बरामद रकम?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल बरामद नकदी की वास्तविक मात्रा को लेकर है।
कुछ शुरुआती रिपोर्टों में चार से पांच करोड़ रुपये की आशंका जताई गई, जबकि अन्य मीडिया रिपोर्टों में देर रात तक करीब चार करोड़ रुपये गिने जाने और कुल रकम 60 करोड़ रुपये से अधिक होने की चर्चाओं का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, 60 करोड़ रुपये मिलने के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए बरामद रकम का अंतिम आंकड़ा सामने आने तक किसी भी अनुमान को पुख्ता तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
पुलिस के मुताबिक, नकदी की गिनती और उसके स्रोत की जांच के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
राजेश यादव के मकान में पुलिस की कार्रवाई क्यों हुई?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बरईपुर रामनगर निवासी राजेश यादव उर्फ बबलू के मकान में भारी मात्रा में नकदी छिपाकर रखे जाने की सूचना पुलिस को मिली थी। इसके बाद पुलिस ने मकान की तलाशी ली और जमीन के अंदर दबे ड्रमों को बरामद किया।
कुछ रिपोर्टों में इस मामले के खुलासे को पारिवारिक विवाद से भी जोड़ा गया है। बताया जा रहा है कि भाइयों के बीच वाहन खरीदने को लेकर हुए विवाद के बाद मकान में छिपाकर रखे गए रुपयों की जानकारी पुलिस तक पहुंची।
हालांकि, विवाद की भूमिका और सूचना मिलने की परिस्थितियों को लेकर सामने आए विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। पुलिस जांच में ही यह स्पष्ट होगा कि छिपाई गई नकदी के बारे में सूचना किसने दी और बरामदगी तक पुलिस कैसे पहुंची।
पुणे से गांव लौटने और संपत्ति खरीदने की चर्चा
स्थानीय लोगों के हवाले से आई खबरों के मुताबिक, संबंधित परिवार के कुछ सदस्य कई वर्षों तक महाराष्ट्र के पुणे में रहे थे। कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन के समय उनके गांव लौटने की बात भी सामने आई है।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया है कि गांव लौटने के बाद संबंधित व्यक्ति ने जमीन खरीदी, मकान बनवाया और वाहन समेत अन्य संपत्तियां अर्जित कीं।
इन परिस्थितियों के बीच अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि बरामद नकदी कहां से आई, किसकी है और उसे जमीन के नीचे ड्रमों में छिपाकर रखने की वजह क्या थी।
पुणे में कथित तौर पर काम करने, वहां से रकम लाने या किसी वित्तीय अनियमितता से संबंध होने जैसे दावों को फिलहाल जांच के दायरे में देखा जाना चाहिए। इन्हें प्रमाणित तथ्य मानने से पहले आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
चार लोग हिरासत में, नकदी के स्रोत की जांच
घटना के बाद पुलिस ने मामले से जुड़े लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआती खबरों में चार लोगों को हिरासत में लिए जाने का उल्लेख है।
पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं:
- इतनी बड़ी मात्रा में नकदी कहां से आई?
- क्या बरामद रकम का संबंध किसी आपराधिक घटना से है?
- नकदी को बैंक या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय जमीन में क्यों दबाया गया?
- क्या इस रकम के संबंध में कोई वित्तीय या आपराधिक अनियमितता हुई है?
- क्या बरामद नकदी और किसी दूसरे राज्य में हुई घटना के बीच कोई संबंध है?
इन सवालों के जवाब जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही सामने आ सकेंगे।
मेरठ के नीले ड्रम कांड की याद क्यों आई?
नीले ड्रम का नाम सामने आते ही लोगों को मेरठ का चर्चित हत्याकांड याद आ जाता है। इस मामले में भी नीले ड्रमों की मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा है।
लेकिन दोनों घटनाओं के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है। मेरठ के मामले में नीले ड्रम का संबंध हत्या और शव छिपाने से था, जबकि प्रयागराज की घटना में जमीन के अंदर दबे ड्रमों से नकदी बरामद होने की खबर है।
इसलिए दोनों घटनाओं को एक जैसा अपराध मानना सही नहीं होगा। प्रयागराज के मामले में जांच का मुख्य केंद्र नकदी का स्रोत, उसका स्वामित्व और उसे छिपाकर रखने की वजह है।
अब आगे क्या होगा?
जांच के दौरान पुलिस को बरामद नकदी की पूरी गिनती करानी होगी और उसके स्रोत से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करनी होगी। आवश्यकता के अनुसार संबंधित वित्तीय एवं अन्य जांच एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक मकान की जमीन के नीचे तीन ड्रमों में इतनी बड़ी मात्रा में नकदी क्यों छिपाकर रखी गई थी।
प्रयागराज के इस ‘नीले ड्रम कांड’ का असली रहस्य तभी खुलेगा, जब नकदी की आधिकारिक कुल राशि, उसके मालिकाना हक और उसके स्रोत को लेकर जांच के ठोस नतीजे सामने आएंगे।
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