मथुरा-वृंदावन नहीं बल्कि मिर्जापुर के इस मंदिर में सबसे पहले खेली जाती है होली
जानें इस रंगोत्सव की परंपरा जो सैकड़ों वर्षों से चली आ रही
Daily News Mirror
Mirzapur| 13 March 2025| Sachin Kumar
मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश: होली के अवसर पर मिर्जापुर जिले के ऐतिहासिक गोवर्धन मंदिर में भक्तों ने रंगों का त्योहार धूमधाम से मनाया। यह मंदिर लगभग 300 वर्ष पुराना है और यहां हर साल बसंत पंचमी के बाद से होली की शुरुआत होती है।
मंदिर में भगवान कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना के बाद भक्तों ने अबीर, गुलाल और रंगों से एक-दूसरे को सराबोर कर होली की शुभकामनाएं दीं। मंदिर के पुजारी पंडित कृष्ण चंद्र पाठक ने बताया कि यह मंदिर गोवर्धन महाराज की प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है, जो मूल रूप से काशी ले जाई जा रही थी, लेकिन रास्ते में विंध्यधाम पड़ने के कारण प्रभु यहीं पर विराजमान हो गए।
इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और परंपरागत तरीके से होली खेली। भक्तों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। यह आयोजन भक्ति और आस्था का संगम बन गया, जहां लोगों ने भगवान कृष्ण के साथ होली खेलने का आनंद लिया। मंदिर के बाहर भी रंगों का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर और गुलाल उड़ाकर होली की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मंदिर के आसपास के क्षेत्र में भी रंगों की धूम मची रही।
इस आयोजन के लिए मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी। मंदिर के अंदर और बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। इसके अलावा, मंदिर के आसपास के क्षेत्र में भी यातायात और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। इस आयोजन में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। यह आयोजन न केवल होली के त्योहार को मनाने का अवसर था, बल्कि यह भगवान कृष्ण के प्रति आस्था और भक्ति का भी प्रदर्शन था।
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