3 करोड़ की डिफेंडर से 4.40 करोड़ की पोर्च तक, जानें कौन है योगी के करीबी सतुआ बाबा?
कभी सतुआ खाकर मिटाते थे भूख, आज हैं करोड़ों...
Daily News Mirror| Prayagraj News
प्रयागराज/वाराणसी: उत्तर प्रदेश की राजनीति और अध्यात्म की दुनिया में इन दिनों एक नाम खूब गूंज रहा है- सतुआ बाबा। प्रयागराज के माघ मेला और महाकुंभ में उनकी लग्जरी कारों की एंट्री से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनकी घनिष्ठता तक, सतुआ बाबा चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। हाल ही में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने प्रयागराज के डीएम पर सतुआ बाबा का नाम लेकर कटाक्ष किया था, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। कौन हैं ये सतुआ बाबा, जिनसे मिलने खुद सीएम योगी पहुंचते हैं? आइए जानते हैं उनकी जीवनी, योगी से नजदीकी और यूपी की राजनीति में उनकी भूमिका की पूरी कहानी।
जीवनी: घर छोड़कर अध्यात्म की राह, सतुआ पीठ के वारिस
सतुआ बाबा का असली नाम संतोष तिवारी है, जिन्हें संतोष दास के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के मसोरा गांव में हुआ था। बचपन से ही अध्यात्म की ओर झुकाव होने के कारण मात्र 11 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और संन्यास की राह अपनाई। वे विष्णु स्वामी संप्रदाय से जुड़े, जो हिंदू धर्म की प्राचीन परंपराओं में से एक है। यह संप्रदाय 18वीं शताब्दी में गुजरात के पलिताना राज्य के रतनपुर गांव में जन्मे संत रणछोड़ दास जी से जुड़ा है, जो बाद में वाराणसी पहुंचे और मणिकर्णिका घाट पर भूखे लोगों को सत्तू (चने का आटा) बांटने लगे। इसी से उन्हें 'सतुआ बाबा' का नाम मिला। इस परंपरा में छह पीठाधीश्वरों के बाद 2012 में ब्रह्मलीन यमुनाचार्य जी महाराज की मृत्यु पर संतोष दास को सतुआ बाबा पीठ का प्रमुख बनाया गया। अब वे जगदगुरु महामंडलेश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा के रूप में जाने जाते हैं।
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के पास स्थित उनके आश्रम में बड़ा भंडारा चलता है, जहां हजारों लोग भोजन करते हैं। वे गौशाला भी संचालित करते हैं और सादगी, करुणा व भक्ति के उपदेश देते हैं। लेकिन उनकी जीवनशैली चर्चा में है- 3 करोड़ की लैंड रोवर डिफेंडर, 4.4 करोड़ की पोर्शे 911 टर्बो एस, रे-बैन चश्मे और प्राइवेट प्लेन में सफर। खुद सतुआ बाबा कहते हैं, "मुझे इनका शौक नहीं, ये सनातन की रफ्तार हैं। सनातन को बांटने वालों को इन्हीं की रफ्तार से रौंद दिया जाएगा।"
योगी आदित्यनाथ से घनिष्ठता: कुंभ में मिलन से संगम स्नान तक
सतुआ बाबा को सीएम योगी आदित्यनाथ का बेहद करीबी माना जाता है। प्रयागराज कुंभ में योगी खुद उनके आश्रम पहुंचे थे, जहां वे साथ में संगम स्नान और पूजा करते नजर आए। हाल ही में माघ मेला 2025-26 में योगी ने सतुआ बाबा के कैंप में जगदगुरु रामानंदाचार्य के प्रकट्य महोत्सव में हिस्सा लिया और उनकी तारीफ की। योगी ने कहा, "सतुआ बाबा समाज को एकजुट करने का अद्भुत कार्य कर रहे हैं। सरकार उनके जुड़े मंदिरों के निर्माण में सहयोग करेगी।"
फरवरी 2025 में महाकुंभ के दौरान भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक के साथ योगी संगम स्नान करने पहुंचे, तो सतुआ बाबा भी साथ थे। योगी ने सतुआ बाबा की जगदगुरु उपाधि के पट्टाभिषेक समारोह में भी हिस्सा लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी की तरह सतुआ बाबा भी ब्राह्मण समुदाय से हैं, जो उनकी नजदीकी का एक कारण हो सकता है। सतुआ बाबा अक्सर योगी के साथ वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर के कार्यक्रमों में दिखते हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूमिका: मौर्या का कटाक्ष और छिपा तनाव
सतुआ बाबा की राजनीतिक प्रासंगिकता तब और बढ़ गई, जब दिसंबर 2025 में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने प्रयागराज के डीएम मनीष कुमार वर्मा पर कटाक्ष किया। डीएम ने सतुआ बाबा के आश्रम में रोटी बनाई थी, जिसका वीडियो वायरल हुआ। मौर्या ने कहा, "ट्रैफिक जाम देखो। सतुआ बाबा की रोटी के चक्कर में मत पड़ो, व्यवस्थाओं पर ध्यान दो।" यह टिप्पणी हल्की लगी, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे योगी-मौर्या के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव का संकेत माना गया।
2017 से योगी और मौर्या के बीच विभागीय विवाद और नेतृत्व की होड़ की खबरें आती रही हैं। सतुआ बाबा को योगी का 'ट्रस्टेड' माना जाता है, इसलिए मौर्या का कटाक्ष सीधे योगी पर निशाना साधने जैसा देखा गया। सतुआ बाबा खुद राजनीतिक बयान देते हैं- उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा, "विधर्मियों के लिए भारत में जगह नहीं, उनका स्थान पाकिस्तान है।" वे योगी और मोदी की तारीफ करते हैं और सनातन धर्म को बढ़ावा देने की बात करते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सतुआ बाबा की बढ़ती लोकप्रियता और लग्जरी लाइफ यूपी की राजनीति में नए समीकरण बना सकती है। क्या वे योगी के उत्तराधिकारी के रूप में उभरेंगे? यह सवाल फिलहाल अनुत्तरित है, लेकिन उनकी मौजूदगी यूपी की सियासत को और रोचक बना रही है।
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