RSS के मंच से अखिलेश पर योगी का तीखा प्रहार: 'कंस-दुर्योधन प्यारे, राम-कृष्ण से नफरत'
'गद्दी विरासत में मिलती है, बुद्धि नहीं' - सीएम योगी
Daily News Mirror| Uttar Pradesh News
गोरखपुर, 22 अक्टूबर 2025: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के 'विचार परिवार कुंटुंब स्नेह मिलन' कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। गोरखपुर के एक कार्यक्रम में बोलते हुए योगी ने अखिलेश को न केवल 'रामद्रोही' बल्कि 'कृष्णद्रोही' और 'सनातन त्योहारों का विरोधी' करार दिया। उन्होंने अखिलेश के हालिया दीपोत्सव वाले बयान को निशाना बनाते हुए कहा कि उन्हें कंस और दुर्योधन जैसे पात्र प्यारे हैं, जबकि राम और कृष्ण से नफरत है।
कार्यक्रम RSS के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था, जिसमें हजारों कार्यकर्ता और उनके परिवारजन शामिल हुए। योगी ने इस मंच को अपनी 'गुरुदक्षिणा' बताते हुए संघ की विचारधारा को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। उन्होंने कहा, "संघ का 100वां वर्ष भारत के नवजागरण और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनेगा।" लेकिन भाषण का मुख्य आकर्षण राजनीतिक टकराव रहा, जहां योगी ने सपा और कांग्रेस दोनों पर सनातन संस्कृति के प्रति असहिष्णुता का आरोप लगाया।
दीपोत्सव बयान से भड़का विवाद
अखिलेश यादव ने हाल ही में दीपोत्सव पर एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने क्रिसमस से प्रेरणा लेते हुए कहा था कि दीयों के बजाय लाइटों का इस्तेमाल किया जाए। इस बयान को योगी ने 'दीपावली से नफरत' का प्रमाण बताते हुए खारिज किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "अखिलेश यादव को दीया जलाने में दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि दीप जलाने की आवश्यकता क्या है? इसका अर्थ है कि उन्हें दीपावली से नफरत है। अब तक तो हम सोचते थे कि अयोध्या में राम जन्मभूमि और हिंदू तीर्थों से ही इनको नफरत होगी।" योगी ने आगे जोड़ा कि ये दीये किसानों के तेल और कुम्हारों की मिट्टी से बनते हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं।
योगी ने अखिलेश के पुराने बयानों का भी जिक्र किया। वृज तीर्थ विकास परिषद के गठन के समय अखिलेश ने कहा था कि वे सैफई में दुर्योधन की मूर्ति लगाएंगे। इस पर योगी ने व्यंग्य किया, "मैंने कहा भाई कंस की भी लगा दीजिए। भाई हम तो भगवान कृष्ण की मथुरा को वृंदावन को सजाएंगे संवारेंगे, क्योंकि हमारे संस्कार हैं। आपको कंस और दुर्योधन प्यारे हैं।" उन्होंने साफ कहा, "हमारे संस्कार भगवान राम और कृष्ण के हैं, जबकि उन्हें कंस और दुर्योधन प्यारे हैं। इसलिए ये लोग न केवल रामद्रोही हैं बल्कि कृष्णद्रोही और सनातन पर्वों के भी विरोधी हैं।"
'गद्दी विरासत में मिलती है, बुद्धि नहीं'
योगी ने अखिलेश के राजनीतिक विरासत पर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा, "कहावत है ना कि गद्दी विरासत में मिलती है। बुद्धि विरासत में नहीं मिलती है। बुद्धि नहीं मिलती है, उसके लिए प्रयास करना होता है और कुछ लोगों की आदत होती है उनके जीवन भर उनका बचपन नहीं जाता है।" यह टिप्पणी अखिलेश के 'बचकाने' बयानों को निशाना बनाते हुए दी गई, जिससे सपा को राष्ट्र-विरोधी कामों का आश्रय मिल रहा है।
राम मंदिर और दीपोत्सव की सराहना
हमले के बीच योगी ने सकारात्मक पक्ष पर भी जोर दिया। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर को 'भारत के आत्मगौरव का प्रतीक' बताया और कहा, "कौन ऐसा भारतीय होगा जिसके मन में कभी यह इच्छा न रही हो कि अयोध्या जाकर श्रीराम जन्मभूमि का दर्शन करे।" 2017 से शुरू हुए दीपोत्सव को उन्होंने ग्रामीण विकास का माध्यम बताया, जहां पहले 51 हजार दीप जलाए जाते थे, अब 26 लाख से अधिक। इससे कुम्हारों की आय बढ़ी है—पहले 50-60 बर्तन बनते थे, अब 400-500 प्रतिदिन। योगी ने कहा कि ये प्रयास प्लास्टिक-मुक्त भारत और किसानों की समृद्धि के लिए हैं।
कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए योगी ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में राम-कृष्ण को 'मिथक' बताया था, जो करोड़ों हिंदुओं की आस्था का अपमान था। उन्होंने चेतावनी दी कि समाज को जाति-भाषा के नाम पर तोड़ने की साजिशें चल रही हैं, इसलिए जागरूक रहना जरूरी है।
राजनीतिक संदर्भ
यह हमला उपचुनावों और आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सपा ने अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पार्टी के करीबी सूत्रों का कहना है कि योगी का यह बयान 'विभाजनकारी राजनीति' का हिस्सा है। RSS कार्यक्रम में योगी की उपस्थिति ने भाजपा की हिंदुत्व एजेंडे को और मजबूत किया है। कार्यक्रम के आयोजक रमेश जी ने कहा, "यह दीपोत्सव केवल दीपों का नहीं बल्कि विचार और संस्कारों का उत्सव है।"योगी का यह प्रहार सपा-भाजपा के बीच जारी जुबानी जंग को और तेज कर सकता है, जहां सनातन संस्कृति मुद्दा बन गया है।
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