शास्त्रीय संगीत के दिग्गज पंडित छन्नूलाल मिश्र ने मिर्जापुर में ली आखिरी सांसे, सुरिली धारा हुई शांत, पीएम मोदी और राष्ट्रपति ने जताया गहरा शोक

Oct 2, 2025 - 17:44
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शास्त्रीय संगीत के दिग्गज पंडित छन्नूलाल मिश्र ने मिर्जापुर में ली आखिरी सांसे, सुरिली धारा हुई शांत, पीएम मोदी और राष्ट्रपति ने जताया गहरा शोक
File photo: Pandit Channulal Mishra ji

Daily News Mirror

वाराणसी/मिर्जापुर, 2 अक्टूबर 2025: हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान सम्राट और पद्मविभूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र का गुरुवार तड़के 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबी बीमारी के बाद उन्होंने मिर्जापुर के गंगा दर्शन कॉलोनी में अपनी बेटी नम्रता मिश्रा के आवास पर अंतिम सांस ली। सुबह करीब 4:15 बजे उनका स्वर्गवास हुआ, जिसकी खबर मिलते ही संगीत जगत और काशी की सांस्कृतिक दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई। उनका पार्थिव शरीर दोपहर तक वाराणसी लाया जाएगा, जहां संगीत प्रेमी अंतिम दर्शन के लिए उमड़ेंगे। शाम 7 बजे मणिकर्णिका घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पंडित जी की तबीयत पिछले कई महीनों से खराब चल रही थी। सितंबर में सीने में संक्रमण और माइनर हार्ट अटैक के कारण उन्हें मिर्जापुर से वाराणसी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। हिमोग्लोबिन की कमी और बेड सोर्स जैसी समस्याओं से जूझते हुए वे लगभग दो सप्ताह अस्पताल में रहे। डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें छुट्टी मिली और एक सप्ताह पूर्व मिर्जापुर लाया गया, जहां रामकृष्ण मिशन अस्पताल के चिकित्सकों की निगरानी में घर पर ही इलाज चल रहा था। बेटी नम्रता ने बताया, "पिताजी लंबे समय से अस्वस्थ थे। डॉक्टरों ने अस्पताल में न रखने की सलाह दी थी, इसलिए घर लाए थे। आज सुबह वे हमारे बीच नहीं रहे।"  

पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के हरिहरपुर गांव में हुआ था। पिता गुरु पंडित बेचन मिश्र से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद उन्होंने वाराणसी में किराना और बनारस घराने की परंपराओं को आत्मसात किया। खयाल, ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती और भक्ति भजनों की उनकी भावपूर्ण गायकी ने शास्त्रीय संगीत को आम जन तक पहुंचाया। 'खेले मसाने वाली होली', 'रसिया तोरी साजना' जैसे गीत आज भी श्रोताओं के दिलों में बसे हैं। वे संकटमोचन मंदिर के संगीत समारोह के प्रमुख आकर्षण रहे और महंत प्रो. वीरभद्र मिश्र से उनका गहरा नाता था। पंडित जी ने वैश्विक मंचों पर भारतीय संगीत की धाक जमाई, जिससे बनारस घराने की ठुमरी शैली विश्व पटल पर चमकी।  

उनकी उपलब्धियों की फेहरिस्त लंबी है। 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्मविभूषण से नवाजे गए पंडित जी को उत्तर प्रदेश सरकार का यश भारती सम्मान भी प्राप्त था। वे शास्त्रीय संगीत को लोकप्रिय बनाने वाले दुर्लभ कलाकार थे, जिन्होंने पीढ़ियों को प्रेरित किया। उनके निधन से भारतीय संगीत को अपूरणीय क्षति हुई है।

 निधन की खबर फैलते ही हस्तियां शोक सभा में शामिल होने लगीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा कर कहा, "सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। वे जीवनपर्यंत भारतीय कला और संस्कृति की समृद्धि के लिए समर्पित रहे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही भारतीय परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने में अमूल्य योगदान दिया। 2014 में वाराणसी से नामांकन के दौरान वे मेरे प्रस्तावक बने थे। मुझे उनका स्नेह और आशीर्वाद हमेशा मिलता रहा। इस दुख की घड़ी में उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना।" राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे "भारतीय संगीत को अपूरणीय क्षति" बताया, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "शास्त्रीय संगीत जगत को गहरा आघात पहुंचा है।" समाजवादी पार्टी ने भी श्रद्धांजलि दी।

पंडित जी के परिवार में एक बेटा रामकुमार मिश्र (तबला वादक) और तीन बेटियां हैं। उनकी पत्नी मनोरमा मिश्रा और बड़ी बेटी संगीता का निधन 2021 में कोरोना संक्रमण से हो चुका था। मिर्जापुर जिला प्रशासन और संस्कार भारती जैसे संगठनों ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था संभाल ली है। काशी के संकटमोचन मंदिर से विशेष प्रार्थना होगी।पंडित छन्नूलाल मिश्र की विदाई के साथ बनारस की गंगा-सी बहती सुरधारा थम सी गई है। उनकी गायकी सदैव अमर रहेगी। ऊं शांति।

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