बरेली हिंसा: सपा प्रतिनिधिमंडल की 'नो एंट्री', माता प्रसाद पांडेय हाउस अरेस्ट, कई सांसदों के घर के बाहर भारी पुलिस तैनात

Oct 4, 2025 - 11:14
Oct 4, 2025 - 11:15
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बरेली हिंसा: सपा प्रतिनिधिमंडल की 'नो एंट्री', माता प्रसाद पांडेय हाउस अरेस्ट, कई सांसदों के घर के बाहर भारी पुलिस तैनात
सपा सांसद इकरा हसन को पुलिस ने रास्ते में रोका

Daily News Mirror| Barelly News 

लखनऊ/बरेली, 4 अक्टूबर 2025: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में 26 सितंबर को जुमे की नमाज के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद अब राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बरेली पहुंचने से रोक दिया गया, जबकि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय को लखनऊ में हाउस अरेस्ट कर लिया गया। संभल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क सहित कई अन्य नेताओं के घरों पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन ने बीएनएसएस की धारा 163 का हवाला देते हुए बाहरी नेताओं के प्रवेश पर रोक लगाई है, जिसे सपा लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बता रही है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर गठित इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात करना और घटना की सच्चाई का पता लगाना था। मंडल में माता प्रसाद पांडेय के अलावा सांसद इकरा हसन, हरेंद्र मलिक, जियाउर्रहमान बर्क, मोहिबुल्लाह, नीरज मौर्य, पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव और प्रवीण सिंह ऐरन जैसे प्रमुख नेता शामिल थे। हालांकि, सुबह होते ही लखनऊ के वृंदावन इलाके में स्थित पांडेय के आवास पर पीजीआई थाने की पुलिस पहुंच गई। उन्हें नोटिस थमाकर बरेली न जाने की हिदायत दी गई, और घर के बाहर भारी संख्या में फोर्स तैनात कर दी गई।

माता प्रसाद पांडेय ने अपने आवास से मीडिया को दिए बयान में कहा, "पुलिस ने मुझे एक नोटिस थमा दिया और दरोगा ने साफ कहा कि घर से बाहर न निकलें। यह कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं था, बल्कि पुलिस ने ही कानून-व्यवस्था बिगाड़ी है। वे पक्षपाती हो गए हैं। अगर दो समुदायों के बीच झड़प होती, तो मैं मान लेता, लेकिन स्थानीय लोगों ने बताया कि सब कुछ शांतिपूर्ण था। सरकार अपनी कमियों को छिपाने की कोशिश कर रही है।" उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बरेली जाने की इजाजत तो है, लेकिन विपक्ष को क्यों रोका जा रहा है? पांडेय ने खुद को "हिस्ट्रीशीअर" बताते हुए पुलिस की नोकझोंक का जिक्र किया, जहां उनके घर के गेट पर ही उन्हें रोक लिया गया।

इधर, संभल में सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क को उनके आवास पर ही हाउस अरेस्ट कर लिया गया। नखासा और रायसत्ती थानों की पुलिस ने उनके घर को घेर लिया है। गाजीपुर बॉर्डर पर सांसद इकरा हसन को रोका गया, जबकि हरेंद्र मलिक और अन्य नेताओं को भी जिलों में ही रोक लिया गया। सपा के प्रदेश महासचिव सहित अन्य नेता पांडेय के आवास पर पहुंचे थे, लेकिन पुलिस की सख्ती के कारण वे आगे नहीं बढ़ सके।सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने लिखा, "बरेली की घटना पर सच्चाई जानने के लिए हमने शांतिपूर्ण प्रतिनिधिमंडल भेजा था, लेकिन योगी सरकार डर रही है। लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज दबाना अधिनायकवाद है। पीड़ितों की पीड़ा सुनने का अधिकार किसे छीन लिया?" यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह हिंसा की जिम्मेदारी से बचने के लिए विपक्ष को निशाना बना रही है।

प्रशासन का पक्ष अलग है। बरेली जिला मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि हिंसा के बाद जिले में हालात संवेदनशील हैं, और बीएनएसएस की धारा 163 के तहत बाहरी व्यक्तियों या राजनीतिक प्रतिनिधियों के प्रवेश पर रोक है ताकि शांति भंग न हो। शहर में भारी सुरक्षाबल तैनात हैं, और पुलिस ने अब तक कई गिरफ्तारियां की हैं, जिनमें IMC नेता नफीस खान और अन्य साजिशकर्ता शामिल हैं। डीएम के अनुसार, यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक है, न कि किसी राजनीतिक दबाव के तहत।

यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ी कर सकती है। सपा ने इसे "लोकतंत्र का गला घोंटने" की कोशिश बताया है, जबकि भाजपा ने सपा के दौरे को "राजनीतिकरण" करार दिया। विपक्षी दलों ने भी समर्थन जताया है, और आने वाले दिनों में विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस की संभावना है। फिलहाल, बरेली में शांति बनी हुई है, लेकिन राजनीतिक तापमान तेज होता जा रहा है।

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