अतीक अहमद के बेटे अली ने सीएम योगी से लगाई गुहार: 'जो हो गया सो हो गया..., अब न सताया जाए'
Daily News Mirror| Prayagraj News
प्रयागराज, 1 अक्टूबर 2025 – उत्तर प्रदेश के पूर्व माफिया विधायक अतीक अहमद के बेटे मोहम्मद अली अहमद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। नैनी सेंट्रल जेल से झांसी जेल में शिफ्ट किए जाने के बाद अली ने मीडिया से बातचीत में कहा, "जो हो गया सो हो गया... अब न सताया जाए।" उन्होंने होम डिस्ट्रिक्ट से 400 किलोमीटर दूर शिफ्ट किए जाने को अन्यायपूर्ण बताते हुए सीएम से हस्तक्षेप की अपील की है। यह घटना अतीक गैंग के खिलाफ योगी सरकार की सख्ती के बीच आई है, जहां अली को गैंग का नया लीडर घोषित कर कार्रवाई की जा चुकी है।
अली अहमद, जो 2022 से रंगदारी के मामले में जेल में बंद हैं, ने प्रयागराज की नैनी जेल में अपने व्यवहार के कारण शासन के आदेश पर झांसी जेल ट्रांसफर किया गया। सूत्रों के अनुसार, जेल प्रशासन ने उनकी 'गतिविधियों' को देखते हुए यह कदम उठाया, जिसमें कैश लेन-देन जैसे आरोप शामिल हैं। बुधवार सुबह करीब 8 बजे हाई सिक्योरिटी के साथ उन्हें प्रिजन वैन से रवाना किया गया। अली ने शिफ्टिंग के बाद कहा, "मैं बेगुनाह हूं। होम डिस्ट्रिक्ट में जेल से 400 किमी दूर भेजना अन्याय है। बचा लें मुख्यमंत्री।" यह बयान सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर वायरल हो गया है, जहां कई लोग इसे 'माफिया के बेटे की साजिश' बता रहे हैं।
पृष्ठभूमि: रंगदारी से जेल तक का सफर
अली का मामला 31 दिसंबर 2021 से जुड़ा है, जब प्रयागराज के करेली इलाके में प्रॉपर्टी डीलर जीशान अहमद (उर्फ जानू) ने आरोप लगाया कि अली और उसके साथियों ने उसके फार्म हाउस पर धावा बोलकर 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी। जीशान ने एफआईआर में अली के अलावा अतीक अहमद और उनके अन्य रिश्तेदारों को भी नामजद किया। इस घटना में फार्म हाउस पर तोड़फोड़ भी की गई थी। लंबे समय फरार रहने के बाद अली ने 30 जुलाई 2022 को प्रयागराज कोर्ट में सरेंडर कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने जून 2022 में अली की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपनी कानून की पढ़ाई में बाधा का हवाला दिया था। अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन ने भी जनवरी 2022 में सीएम योगी को पत्र लिखकर इसे 'सियासी साजिश' बताया था और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शाइस्ता ने कहा था कि पुलिस बड़े अधिकारियों के दबाव में अतीक परिवार के नाम जोड़ रही है। हालांकि, योगी सरकार ने अतीक गैंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रखी। अतीक की मौत (अप्रैल 2023) के बाद प्रयागराज कमिश्नरेट पुलिस ने अली को गैंग का लीडर घोषित कर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की।
परिवार की पुरानी अपीलें: न्याय की बार-बार गुहार
यह पहली बार नहीं है जब अतीक परिवार ने सीएम योगी से गुहार लगाई हो। 2022 में शाइस्ता ने पत्र लिखकर बेटे को 'बचाने' की अपील की थी, जबकि अक्टूबर 2022 में उन्होंने योगी की तारीफ करते हुए मुलाकात का समय मांगा। अप्रैल 2023 में अतीक और भाई अशरफ की हत्या के बाद अली ने एक खुला पत्र लिखकर योगी और सपा नेता अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहराया। शाइस्ता ने उमेश पाल हत्याकांड (फरवरी 2023) के बाद भी पत्र लिखा, जिसमें बड़े अफसरों और मंत्रियों की संलिप्तता का आरोप लगाया। लेकिन ये अपीलें बेअसर रहीं, और सरकार ने अतीक की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह जैसे विशेषज्ञों के अनुसार, योगी सरकार ने माफिया राज को खत्म करने के लिए सख्त नीति अपनाई है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अतीक-मुख्तार जैसे गैंग वोट बैंक के लिए पनपे, लेकिन अब कानून का राज है। अली के ट्रांसफर को जेल अनुशासन का हिस्सा बताते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि यह सुरक्षा और गैंग गतिविधियों को रोकने के लिए जरूरी है।
आगे क्या?
अली की गुहार पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जेल विभाग ने ट्रांसफर को 'रूटीन प्रक्रिया' बताया है। लेकिन यह घटना अतीक गैंग के अवशेषों के खिलाफ चल रही कार्रवाई को नई बहस दिला रही है। क्या सीएम योगी इस अपील पर विचार करेंगे, या यह भी परिवार की एक और कोशिश साबित होगी? आने वाले दिनों में कोर्ट सुनवाई और जांच ही इसका जवाब देगी।
(यह रिपोर्ट विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। अधिक अपडेट के लिए बने रहें।)
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