यूपी में प्राइमरी स्कूलों के मर्जर पर शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान: कोई स्कूल बंद नहीं होगा, बाल वाटिका को बढ़ावा

Jul 31, 2025 - 22:43
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यूपी में प्राइमरी स्कूलों के मर्जर पर शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान: कोई स्कूल बंद नहीं होगा, बाल वाटिका को बढ़ावा
फोटो: बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह

Daily News Mirror| Lucknow

लखनऊ, 31 जुलाई 2025: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने प्राथमिक स्कूलों के मर्जर को लेकर चल रही चर्चाओं पर स्पष्टता प्रदान करते हुए एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोई भी प्राथमिक स्कूल बंद नहीं किया जाएगा, और मर्जर की प्रक्रिया को छात्रों की सुविधा और शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर लागू किया जाएगा। यह बयान उन खबरों के जवाब में आया है, जिनमें स्कूलों के विलय और शिक्षकों के पदों को लेकर भ्रम की स्थिति थी। 

मर्जर नीति की प्रमुख बातें

मंत्री संदीप सिंह ने प्राथमिक स्कूलों के मर्जर के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश स्पष्ट किए:1 किलोमीटर की दूरी का नियम: किसी भी स्कूल का मर्जर तब तक नहीं होगा, जब तक कि नजदीकी स्कूल 1 किलोमीटर से अधिक दूरी पर न हो। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को लंबी दूरी तय करने की असुविधा से बचाया जाएगा। 

50 से कम छात्र वाले स्कूल: जिन प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की संख्या 50 से कम है, उनका मर्जर किया जा सकता है। हालांकि, यदि मर्जर से छात्रों को किसी भी प्रकार की असुविधा होती है, तो ऐसे स्कूलों का मर्जर नहीं किया जाएगा।

कोई स्कूल बंद नहीं होगा: मंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश में कोई भी प्राथमिक स्कूल बंद नहीं किया जाएगा। मर्जर का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग और शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना है, न कि स्कूलों को बंद करना।

बाल वाटिका की शुरुआत: जिन प्राथमिक स्कूलों में छात्र संख्या कम है या खाली पड़े हैं, वहां 15 अगस्त 2025 से प्री-एजुकेशन के लिए बाल वाटिका शुरू की जाएगी। यह कदम छोटे बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने के लिए उठाया गया है, ताकि उनकी नींव मजबूत हो सके।

शिक्षकों के पद सुरक्षित: मंत्री ने स्पष्ट किया कि मर्जर प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों के किसी भी स्वीकृत पद को समाप्त नहीं किया जाएगा। यह शिक्षकों के बीच नौकरी की सुरक्षा को लेकर चल रही चिंताओं को दूर करने का प्रयास है।

हाईकोर्ट का फैसला और नीति की पृष्ठभूमि

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के विलय के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि संविधान के तहत अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्रदान करने के लिए 1 किलोमीटर के दायरे में स्कूल की बाध्यता नहीं है। कोर्ट के इस फैसले ने मर्जर नीति को और मजबूती प्रदान की है। 

बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि कम नामांकन वाले स्कूलों को बंद करने के बजाय, उन्हें निकटवर्ती स्कूलों के साथ जोड़ा (पेयरिंग) जाएगा, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि मर्जर का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की व्यवस्था को और प्रभावी बनाना है।

बाल वाटिका: प्री-एजुकेशन पर जोर

बेसिक शिक्षा मंत्री ने बाल वाटिका योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस योजना के तहत कम नामांकन वाले स्कूलों को प्री-प्राइमरी शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। 15 अगस्त 2025 से शुरू होने वाली बाल वाटिका में 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों और शिक्षामित्रों को तैनात किया जाएगा। यह कदम NEP 2020 के उस लक्ष्य को साकार करने की दिशा में है, जिसमें 2030 तक सार्वभौमिक पूर्व-प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। 

शिक्षकों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

मंत्री के इस बयान का शिक्षक संगठनों और अभिभावकों ने स्वागत किया है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने इसे शिक्षकों के हित में एक सकारात्मक कदम बताया। हालांकि, कुछ शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि मर्जर प्रक्रिया में शिक्षकों और स्थानीय समुदायों से परामर्श किया जाए ताकि स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होने वाली समस्याओं का समाधान हो सके। 

 अभिभावकों का कहना है कि 1 किलोमीटर की दूरी का नियम ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के लिए सुविधाजनक होगा, लेकिन वे चाहते हैं कि परिवहन और बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाए।योगी सरकार का शिक्षा सुधार पर जोरयोगी सरकार ने स्कूल मर्जर नीति को शिक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस नीति से न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता में भी सुधार होगा। इसके अलावा, मिड-डे मील (MDM) और निपुण भारत जैसे कार्यक्रमों के जरिए बच्चों के पोषण और सीखने के परिणामों को बेहतर करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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