इटावा कथावाचक पिटाई कांड: चोटी काटने से लेकर पुलिस पर पथराव तक, भड़का जातिगत बवाल!
इटावा, 26 जून 2025: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के बकेवर थाना क्षेत्र के दांदरपुर गांव में 21 जून 2025 को हुई कथावाचक पिटाई की घटना ने सामाजिक और राजनीतिक हलचल मचा दी है। इस मामले में यादव समाज के कथावाचकों, मुकुट मणि यादव और संत सिंह यादव, के साथ मारपीट, चोटी काटने और अपमानजनक व्यवहार की घटना सामने आई थी। इस प्रकरण ने जातिगत तनाव और सियासी रंग ले लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी, वहीं यादव रेजिमेंट के गांव में घुसने की कोशिश ने स्थिति को और जटिल कर दिया।
यादव रेजिमेंट का गांव में घुसने का प्रयास और पुलिस की प्रतिक्रिया
घटना के बाद, 26 जून 2025 को यादव समाज से जुड़े संगठन 'अहीर रेजिमेंट' और अन्य कार्यकर्ताओं ने दांदरपुर गांव में घुसकर प्रदर्शन करने की कोशिश की। इस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई, और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, उपद्रवियों ने फायरिंग भी की, जिससे पुलिस की गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं।
पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया और कई उपद्रवियों को हिरासत में लिया। कुछ प्रदर्शनकारी अपनी गाड़ियां छोड़कर भाग गए, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया। इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि घटना के बाद चार आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, और मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है। पुलिस ने यह भी कहा कि मामला संवेदनशील है, और वे निष्पक्ष जांच कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह का सांप्रदायिक या जातिगत तनाव न बढ़े।
ओपी राजभर का बयान
ओमप्रकाश राजभर ने इटावा कथावाचक पिटाई मामले की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं सामाजिक सौहार्द के लिए अस्वीकार्य हैं। उन्होंने कहा, "यादवों को अपना काम करना चाहिए, और दूसरों के हिस्से में दखल नहीं देना चाहिए। यह सामाजिक संतुलन के लिए जरूरी है।" राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग दो-दो आधार कार्ड बनवाकर दूसरों का अधिकार छीन रहे हैं, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ता है। उनके इस बयान ने मामले को और विवादास्पद बना दिया, क्योंकि इसे कुछ लोग जातिगत टिप्पणी के रूप में देख रहे हैं।
मामले का पृष्ठभूमि और विवाद
21 जून को दांदरपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन के दौरान कथावाचक मुकुट मणि यादव और उनके सहायक संत सिंह यादव पर यह आरोप लगा कि उन्होंने अपनी जाति छिपाकर कथा करने की कोशिश की। ग्रामीणों ने उनकी जाति पूछी, और जब पता चला कि वे यादव हैं, तो कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की, उनकी चोटी काटी, और कथित तौर पर नाक रगड़वाने और मानव मूत्र छिड़कने जैसे अपमानजनक कृत्य किए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भी नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, मामले में नया मोड़ तब आया जब आयोजक परिवार की महिला रेनू तिवारी ने कथावाचकों पर छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया। रेनू ने दावा किया कि कथावाचक मुकुट मणि ने उनके साथ बदतमीजी की कोशिश की, और उनके झोले में एक फर्जी आधार कार्ड मिला जिसमें 'अग्निहोत्री' लिखा था। इस आधार पर पुलिस ने कथावाचकों के खिलाफ भी धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया।
सियासी और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने ब्राह्मण बनाम यादव की सियासी और सामाजिक लड़ाई का रूप ले लिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे जातिगत उत्पीड़न का मामला बताते हुए सरकार पर निशाना साधा और तीन दिनों में कड़ी कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। दूसरी ओर, प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने इसे सामाजिक विद्वेष का मामला बताते हुए कहा कि पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई कर रही है।
ब्राह्मण महासभा ने भी कथावाचकों पर अभद्र व्यवहार के आरोप लगाते हुए दोनों पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। विश्व यादव परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अवधेश यादव ने पीड़ित कथावाचकों से मुलाकात कर उन्हें समर्थन देने का वादा किया।
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