अमेरिका का ईरान पर ऐतिहासिक हमला: परमाणु ठिकानों पर बंकर बस्टर बमों से हमला, क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ी
22 जून 2025: अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाते हुए एक अभूतपूर्व सैन्य हमला किया, जिसने मध्य पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए दावा किया कि ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकाने—फोर्डो, नतांज, और इस्फहान—को "पूरी तरह नष्ट" कर दिया गया। इस हमले में अमेरिकी वायुसेना ने बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स का उपयोग किया, जो 30,000 पाउंड वजनी जीबीयू-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (एमओपी), यानी 'बंकर बस्टर' बमों को ले जाने में सक्षम हैं। शुरुआती खबरों में "क्लस्टर बम" का जिक्र था, लेकिन विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि इस ऑपरेशन में केवल बंकर बस्टर बमों का ही उपयोग हुआ।
हमले का विवरण
अमेरिकी सेना ने इस ऑपरेशन में छह बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया, जिन्होंने फोर्डो पर एक दर्जन बंकर बस्टर बम गिराए। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना के पनडुब्बियों ने नतांज और इस्फहान पर 30 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागीं। फोर्डो, जो कोम शहर के पास एक पहाड़ के नीचे 80-90 मीटर की गहराई में स्थित है, ईरान के यूरेनियम संवर्धन का प्रमुख केंद्र था। यह सुविधा 83.7% तक यूरेनियम संवर्धन कर रही थी, जो परमाणु हथियार के लिए आवश्यक 90% के बेहद करीब है। जीबीयू-57 बम, जिसे 2004 में विशेष रूप से फोर्डो जैसे गहरे ठिकानों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, 200 फीट कंक्रीट या 130 फीट चट्टान को भेद सकता है।
हमले की योजना में इजरायल के साथ "पूर्ण समन्वय" था, जैसा कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पुष्टि की। बी-2 बॉम्बर्स ने मिसौरी के व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस से उड़ान भरी और हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया के रणनीतिक अड्डे का उपयोग किया। स्टील्थ तकनीक के कारण ये विमान ईरानी रडार से बच निकले, और सभी सुरक्षित वापस लौट आए।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान की परमाणु ऊर्जा संगठन ने हमलों की पुष्टि की, लेकिन दावा किया कि "कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ" और परमाणु कार्यक्रम निर्बाध जारी रहेगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे "अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन" बताते हुए चेतावनी दी कि "हमले के स्थायी परिणाम होंगे" और तेहरान "सभी विकल्पों" पर विचार कर रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार हुसैन शरीअतमदारी ने अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर मिसाइल हमले और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी, जो वैश्विक तेल व्यापार का 20% हिस्सा संभालता है।
हमले के कुछ घंटों बाद, ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों की ताजा बौछार की, जिसमें तेल अवीव और हाइफा में 16 लोग घायल हुए। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि महत्वपूर्ण सामग्री को हमले से पहले सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया था।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी संगठन (आईएईए) ने कहा कि हमले के बाद "ऑफ-साइट रेडिएशन स्तरों में कोई वृद्धि नहीं हुई," लेकिन स्थिति की निगरानी जारी है। आईएईए प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने परमाणु सुविधाओं पर हमले की निंदा करते हुए सभी पक्षों से "अधिकतम संयम" बरतने की अपील की।
इजरायल ने इस हमले का स्वागत किया, जिसमें नेतन्याहू ने इसे "इतिहास बदलने वाला" करार दिया। दूसरी ओर, कई डेमोक्रेटिक अमेरिकी सांसदों ने इस कार्रवाई की आलोचना की, जिसमें सीनेटर जीन शाहीन ने कहा कि "अमेरिका को ईरान के साथ युद्ध में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।"
बंकर बस्टर बम की तकनीक
जीबीयू-57 एमओपी, जिसे 'बंकर बस्टर' कहा जाता है, 20 फीट लंबा और 30,000 पाउंड वजनी है, जिसमें 5,300 पाउंड विस्फोटक होता है। इसका स्टील अलॉय केस इसे गहरे भूमिगत ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम बनाता है। केवल बी-2 स्टील्थ बॉम्बर ही इसे ले जा सकता है, और एक हमले में कई बमों की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि पहला बम छेद बनाता है और दूसरा उसे गहरा करता है।
भविष्य की आशंकाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम को एक से दो साल पीछे धकेल सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता, क्योंकि ईरान के पास तकनीकी ज्ञान और पुनर्निर्माण की क्षमता है। ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों—जैसे कतर, यूएई, और बहरीन में मौजूद बेस—पर जवाबी हमले की आशंका बढ़ गई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर होगा।
ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, तो "और बड़े हमले होंगे।" इस बीच, विश्व समुदाय इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है, क्योंकि यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकता है।
अमेरिका का यह हमला ईरान के परमाणु महत्वाकांक्षाओं को झटका देने की कोशिश है, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम अनिश्चित हैं। मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और ईरान की जवाबी कार्रवाई की धमकियां वैश्विक शांति के लिए खतरा बन सकती हैं।
स्रोत: बीबीसी, एनबीसी न्यूज, न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्जियन, और एक्स पर पोस्ट.
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