भदोही के गांवों में पीने के पानी का संकट: दूषित पानी से बीमारियों का प्रकोप, शासन बेपरवाह

कोनिया क्षेत्र में दर्जनों गांव प्रभावित

Apr 6, 2025 - 19:21
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भदोही के गांवों में पीने के पानी का संकट: दूषित पानी से बीमारियों का प्रकोप, शासन बेपरवाह
फोटो: हैंडपंप से निकलता दूषित पानी

Daily News Mirror

Bhadohi| 06 April 2025| Jitendra Pandey

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में गंगा के किनारे बसे गांवों में पीने के पानी का संकट गहराता जा रहा है। कोनिया क्षेत्र के मवैयाथानसिंह गांव सहित तुलसीकला, धनतुलसी, छेछुआ, कलिक, भभौरी, बहपुरा, इटहरा, कुड़ी, दुगुना, अरई, डीघ, कटरा, सीतामढ़ी और बनकट जैसे गांवों में पानी की गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी है कि लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। हैंडपंप और समरसेबल से निकलने वाला पानी न सिर्फ गंदा और दुर्गंधयुक्त है, बल्कि इसमें डीजल जैसा ऑयली पदार्थ और कचरा भी मिल रहा है। इससे गांववासियों में पेट, त्वचा और आंखों से संबंधित बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। 

मवैयाथानसिंह में गहराया संकट

डीघ ब्लॉक के मवैयाथानसिंह गांव में स्थिति बेहद चिंताजनक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हैंडपंप से निकलने वाला पानी कुछ ही देर में गाढ़ा पीला हो जाता है और उसमें तेज दुर्गंध के साथ ऑयली पदार्थ दिखाई देता है। गांव के ज्यादातर बोरिंग और हैंडपंप इस समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की यह हालत उनके स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं आए दिन बीमार पड़ रहे हैं।

हर घर नल से जल परियोजना ठप

'हर घर नल से जल' परियोजना, जो स्वच्छ पेयजल की उम्मीद लेकर आई थी, इन गांवों में दो साल से अधूरी पड़ी है। मवैयाथानसिंह में टंकी का निर्माण आधा-अधूरा छोड़ दिया गया है और कार्यदाई संस्था पिछले दो साल से गायब है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे। कुछ दिनों पहले गांव के पवन तिवारी ने IGRS पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज कर शासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बीमारियों का बढ़ता प्रकोप

दूषित पानी के कारण इन गांवों में स्वास्थ्य संकट गहरा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पेट दर्द, उल्टी, त्वचा पर चकत्ते और आंखों में जलन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। पानी में कचरा और ऑयली पदार्थ की मौजूदगी इसे और खतरनाक बना रही है। ग्रामीणों में डर का माहौल है, क्योंकि उनके पास पीने के लिए स्वच्छ पानी का कोई विकल्प नहीं बचा है।

शासन की उदासीनता पर सवाल

गंगा के किनारे बसे इन गांवों की यह बदहाली शासन-प्रशासन की उदासीनता को उजागर करती है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी शिकायतों को लगातार अनसुना किया जा रहा है। पानी की गुणवत्ता की जांच और परियोजना को पूरा करने की मांग जोर पकड़ रही है। स्थानीय लोग चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

आगे की राह

भदोही जिले के इन गांवों में पीने के पानी की समस्या अब एक गंभीर मानवीय संकट बन चुकी है। स्वच्छ पानी हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन यहां के लोग इस मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। शासन को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है, ताकि दूषित पानी से होने वाली बीमारियों को रोका जा सके और अधूरी पड़ी परियोजनाओं को पूरा कर ग्रामीणों को राहत दी जा सके।

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