यूपी थानों में जातिगत पोस्टिंग पर अखिलेश का हमला, डीजीपी ने दिया जवाब

अखिलेश यादव ने आंकड़े पेश करते हुए इसे 'सिंह भाई' का कब्जा बताया

Apr 22, 2025 - 00:23
Apr 22, 2025 - 00:28
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यूपी थानों में जातिगत पोस्टिंग पर अखिलेश का हमला, डीजीपी ने दिया जवाब
फोटो: अखिलेश यादव

लखनऊ, 22 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश में थानों में पुलिस अधिकारियों की तैनाती को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि प्रदेश के थानों में थानेदारों की पोस्टिंग में जातिगत भेदभाव किया जा रहा है और एक विशेष जाति, खासकर ठाकुर समुदाय, को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) समुदाय के पुलिसकर्मियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके इन आरोपों का उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार ने तथ्यों के साथ खारिज करते हुए इसे भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना बताया।

अखिलेश यादव के आरोप

अखिलेश यादव ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई जिलों के आंकड़े साझा करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि आगरा के 48 थानों में केवल 15 थानेदार पीडीए समुदाय से हैं, जबकि शेष में ज्यादातर ठाकुर समुदाय के अधिकारी तैनात हैं। इसी तरह, मैनपुरी में 15 थानाध्यक्षों में केवल 3 पीडीए और 10 ठाकुर, चित्रकूट में 10 में से 2 पीडीए और 5 ठाकुर, और महोबा में 11 में से 3 पीडीए और 6 ठाकुर समुदाय के हैं। अखिलेश ने इसे "सिंह भाई" का दबदबा बताते हुए सरकार पर सामाजिक न्याय को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

उन्होंने प्रयागराज का उदाहरण देते हुए कहा कि 90% पीडीए आबादी को केवल 25% प्रतिनिधित्व मिला है, जिसे उन्होंने "आनुपातिक अन्याय" करार दिया। अखिलेश ने बीजेपी पर "बांटो और राज करो" की नीति अपनाने और जातीय ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया।

डीजीपी प्रशांत कुमार का पलटवार

अखिलेश के इन आरोपों का जवाब देते हुए डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि पुलिस विभाग में थानेदारों की तैनाती शासन के निर्धारित मानकों और आरक्षण नियमों के अनुसार की जाती है। उन्होंने अखिलेश के दावों को "सरासर गलत" और "भ्रामक" बताते हुए कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए। डीजीपी ने जोर देकर कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी गलत है और संबंधित जिलों ने पहले ही सही आंकड़े साझा किए हैं।

डीजीपी ने आंकड़ों के साथ जवाब देते हुए बताया कि आगरा में 49 थानों में 21 सामान्य श्रेणी, 19 ओबीसी और 9 अनुसूचित जाति/जनजाति के थानेदार हैं। प्रयागराज में 44 थानों में 27 सामान्य, 11 ओबीसी और 6 अनुसूचित जाति/जनजाति के थानेदार तैनात हैं। महोबा में 53% सामान्य, 31% ओबीसी और 16% एससी/एसटी वर्ग के थानाध्यक्ष हैं। चित्रकूट में 12 थानों में 3 ओबीसी, 2 एससी/एसटी और 7 अन्य वर्ग के थानेदार हैं। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि नियुक्तियां कर्तव्यनिष्ठा, सत्यनिष्ठा और सामाजिक सद्भाव के आधार पर होती हैं।

पुलिस विभाग का सोशल मीडिया पर जवाब

विभिन्न जिलों की पुलिस ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अखिलेश के दावों का खंडन किया। आगरा पुलिस ने अपनी पोस्ट में कहा कि एसएचओ की नियुक्ति में शासन के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। प्रयागराज पुलिस ने बताया कि उनके 40% थाना प्रभारी ओबीसी और एससी/एसटी वर्ग से हैं। महोबा पुलिस ने भी अपने आंकड़े साझा कर तैनाती में संतुलन होने की बात दोहराई।

राजनीतिक घमासान

यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया नहीं है। अखिलेश यादव पहले भी योगी सरकार पर थानेदारों की तैनाती में जातिवाद का आरोप लगाते रहे हैं। दूसरी ओर, बीजेपी नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि अखिलेश की सरकार में भी एक विशेष जाति को प्राथमिकता दी जाती थी। बीजेपी ने अखिलेश पर जातिगत राजनीति करने और समाज को बांटने का आरोप लगाया।

यह विवाद एक बार फिर उत्तर प्रदेश में जाति और राजनीति के गहरे रिश्ते को उजागर करता है। जहां अखिलेश यादव ने पीडीए समुदाय के लिए सामाजिक न्याय की वकालत की, वहीं डीजीपी और पुलिस विभाग ने तथ्यों के साथ उनकी बात को खारिज किया। यह मुद्दा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहेगा।

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