पापा, मुझे बचा लो... मैं मरना नहीं चाहता!" 2 घंटे तक कार की छत पर चीखता रहा युवराज, पिता और पुलिस के सामने मौत के मुंह में समाया

प्रशासन की घोर लापरवाही ने एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान ले ली

Jan 20, 2026 - 10:33
Jan 20, 2026 - 10:34
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पापा, मुझे बचा लो... मैं मरना नहीं चाहता!" 2 घंटे तक कार की छत पर चीखता रहा युवराज, पिता और पुलिस के सामने मौत के मुंह में समाया
सिस्टम की घोर लापरवाही ने छीन ली युवराज की जिंदगी

Daily News Mirror| Noida News

Noida, 20 जनवरी 2026: सेक्टर 150 में घने कोहरे की आड़ में प्रशासन की घोर लापरवाही ने एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान ले ली। 27 वर्षीय युवराज मेहता की SUV कार एक अंडर-कंस्ट्रक्शन कमर्शियल प्रोजेक्ट के लिए खोदे गए गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई, जहां वह लगभग दो घंटे तक जिंदगी की जंग लड़ता रहा। इस हादसे ने न केवल परिवार को तोड़ दिया है, बल्कि दिल्ली-NCR जैसे विकसित इलाके में सड़क सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की पोल भी खोल दी है।

क्या हुआ घटना की रात?

घटना 18 जनवरी की देर रात (या 17 जनवरी की मध्यरात्रि) की है। युवराज मेहता, जो गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करते थे, काम से लौटते हुए सेक्टर 150 के टाटा यूरिका पार्क सोसाइटी की ओर जा रहे थे। घने कोहरे और खराब विजिबिलिटी के कारण उनकी मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा एक क्षतिग्रस्त बाउंड्री वॉल से टकराकर लगभग 20-70 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। यह गड्ढा ATS Le Grandiose के पास एक कमर्शियल प्रोजेक्ट के बेसमेंट के लिए खोदा गया था।

युवराज कार से बाहर निकलने में कामयाब रहे और कार की छत पर चढ़कर मदद के लिए चिल्लाते रहे। उन्होंने अपने पिता राजकुमार मेहता को कॉल किया और कहा, "पापा, मुझे बचा लो... मैं मरना नहीं चाहता।" पिता ने तुरंत पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF को सूचित किया। पिता घटनास्थल पर पहुंचे और अपने बेटे की पुकार सुनते रहे, लेकिन मदद न पहुंच सकी। युवराज ने फोन की टॉर्च जलाकर सिग्नल देने की भी कोशिश की, लेकिन ठंडे पानी, लोहे की रॉड्स और तैराकी न आने के बहाने बनाकर बचाव दल तमाशबीन बने रहे।

लगभग 90 मिनट से दो घंटे तक संघर्ष करने के बाद युवराज कार समेत पानी में डूब गए। अंत में, एक डिलीवरी एजेंट मनिंदर (या मोनिंदर) ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने अपनी कमर पर रस्सी बांधकर पानी में उतरकर युवराज को निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। युवराज की बॉडी लगभग चार-पांच घंटे बाद निकाली गई।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने क्या कहा?

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण asphyxiation (दम घुटना) और कार्डियक फेलियर (हृदय गति रुकना) बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, युवराज की मौत डूबने से पहले की घबराहट, ठंड और पैनिक से हुई। परिवार का आरोप है कि अगर समय पर बचाव होता, तो युवराज बच सकता था।

प्रशासन की लापरवाही: पहले भी शिकायतें, फिर भी चुप्पी

स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस गड्ढे में पहले भी हादसे हो चुके हैं, लेकिन नोएडा अथॉरिटी ने कोई कदम नहीं उठाया। इलाके में करोड़ों के फ्लैट्स हैं, लेकिन सड़क पर न स्ट्रीट लाइट्स हैं, न रिफ्लेक्टर्स और न ही गड्ढे पर बैरिकेडिंग। घने कोहरे में ओवरस्पीडिंग का भी जिक्र पुलिस की शुरुआती जांच में आया है, लेकिन मुख्य दोष लापरवाही पर है।

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन की नाकामी पर सवाल उठाए। एक निवासी ने कहा, "यह हादसा नहीं, हत्या है।" मनिंदर की बहादुरी की सराहना हो रही है, लेकिन पुलिस और फायर ब्रिगेड की कायरता पर शर्मिंदगी जताई जा रही है।

क्या कार्रवाई हुई?

नोएडा अथॉरिटी ने जूनियर इंजीनियर को टर्मिनेट कर दिया और ट्रैफिक वर्क्स से जुड़े अन्य अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया। बिल्डर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की गई है, लेकिन परिवार और स्थानीय लोग इससे संतुष्ट नहीं हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय और स्थानीय MLA से भी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

सवाल जो बाकी हैं

क्या दिल्ली-NCR जैसे हाई-टेक इलाके में दो घंटे में एक डूबते इंसान को बचाने का साधन नहीं जुटाया जा सकता? गड्ढा क्यों नहीं भरा गया? क्या आपात सेवाएं सिर्फ दिखावा हैं? यह घटना शहरों में सड़क सुरक्षा और बचाव तंत्र की कमी को उजागर करती है। युवराज की मौत एक चेतावनी है – अगर सुधार नहीं हुआ, तो ऐसी त्रासदियां जारी रहेंगी।

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