यूपी SIR 2026: 2.89 करोड़ वोटरों के नाम कटे, कुल वोटर अब 12.55 करोड़; ड्राफ्ट में जानें जिले-वार डिटेल्स और फर्जी वोटरों की स्थिति

अगर वोटर लिस्ट में नहीं है आपका नाम तो जानें कैसे अपडेट करवाएं

Jan 6, 2026 - 18:40
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यूपी SIR 2026: 2.89 करोड़ वोटरों के नाम कटे, कुल वोटर अब 12.55 करोड़; ड्राफ्ट में जानें जिले-वार डिटेल्स और फर्जी वोटरों की स्थिति
फोटो: प्रेस कॉन्फ्रेंस से

 Daily News Mirror| UP News 

लखनऊ, 6 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 2026 के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में कुल 15.44 करोड़ वोटरों में से 2.89 करोड़ (18.7%) नामों को डिलीट किया गया है। अब ड्राफ्ट लिस्ट में 12.55 करोड़ वोटर बचे हैं, जो कुल का 81.3% है। यह भारत में अब तक का सबसे बड़ा वोटर लिस्ट क्लीन-अप अभियान है, जिसमें मृत, शिफ्टेड और डुप्लिकेट वोटरों को हटाया गया है। इस प्रक्रिया से फर्जी वोटिंग पर लगाम लगेगी, लेकिन कुछ वैध वोटरों को भी अपनी डिटेल्स अपडेट करानी पड़ सकती है।

कुल वोटरों का हिसाब-किताब: क्या-क्या कटे नाम?

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा के अनुसार, डिलीट हुए नामों का ब्रेकडाउन इस प्रकार है:

मृत वोटर: 46.23 लाख (2.99%) – ये वे नाम हैं जो मौत हो चुकी है, लेकिन लिस्ट से नहीं हटाए गए थे। 

शिफ्टेड या एब्सेंट वोटर: 2.17 करोड़ (14.06%) – ये वे लोग हैं जो अपने रजिस्टर्ड एड्रेस से शिफ्ट हो चुके हैं या BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा नहीं मिले।

डुप्लिकेट एंट्रीज (फर्जी वोटर): 25.47 लाख (1.65%) – ये मल्टीपल जगहों पर रजिस्टर्ड नाम हैं, जो फर्जी वोटिंग का मुख्य कारण माने जाते हैं।

 रिनवा ने कहा कि यह अभियान 2003 के बाद का सबसे बड़ा रिवीजन है, जिसमें घर-घर जाकर वेरिफिकेशन किया गया। डिलीट हुए वोटरों में से जो 'अनट्रेसेबल' या 'मिसिंग' हैं, उन्हें अपनी नाम वापस जुड़वाने के लिए 2003 SIR लिस्ट में शामिल होने का सबूत या ECI द्वारा निर्धारित कोई दस्तावेज जमा करना होगा।

क्लेम और ऑब्जेक्शन फाइल करने की विंडो 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक खुली है, और फाइनल लिस्ट 6 मार्च 2026 को जारी होगी। फॉर्म 6 (नाम जुड़वाने के लिए), फॉर्म 7 (डिलीट कराने के लिए) और फॉर्म 8 (करेक्टर के लिए) eci.gov.in पर ऑनलाइन सबमिट किए जा सकते हैं।

जिले-वार डिटेल्स: सबसे ज्यादा कहां कटे नाम?

SIR प्रक्रिया में जिले-वार डिलीशंस की रिपोर्ट से पता चलता है कि शहरी और घनी आबादी वाले जिलों में सबसे ज्यादा नाम कटे हैं। टॉप जिलों की लिस्ट इस प्रकार है:

लखनऊ: 12,00,138 नाम कटे (राज्य में सबसे ज्यादा)।

प्रयागराज: 11,56,305 नाम कटे।

कानपुर नगर: 9,02,148 नाम कटे।

आगरा: 8,36,943 नाम कटे।

गाजियाबाद: 8,18,139 नाम कटे।

मेरठ: 6,65,635 नाम कटे।

गोरखपुर: 6,45,625 नाम कटे।

ये आंकड़े दिखाते हैं कि लखनऊ, प्रयागराज और कानपुर नगर में सबसे ज्यादा डिलीशंस हुए, जो कुल डिलीट का बड़ा हिस्सा हैं। इन जिलों में शिफ्टेड वोटरों की संख्या ज्यादा होने का कारण तेज शहरीकरण और माइग्रेशन माना जा रहा है।

सबसे ज्यादा फर्जी वोटर कहां थे?

फर्जी वोटर मुख्य रूप से डुप्लिकेट एंट्रीज से जुड़े हैं, जिनकी कुल संख्या 25.47 लाख है। जिले-वार स्पेसिफिक डेटा उपलब्ध नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि घनी आबादी वाले जिलों जैसे लखनऊ, गाजियाबाद और मेरठ में डुप्लिकेट नाम ज्यादा पाए गए, क्योंकि यहां मल्टीपल रजिस्ट्रेशन के मामले आम हैं।

  CEO रिनवा ने कहा कि यह प्रक्रिया फर्जी वोटिंग को रोकने के लिए जरूरी थी, और अब लिस्ट ज्यादा साफ-सुथरी हो गई है। हालांकि, विपक्षी पार्टियां जैसे समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि कुछ वैध वोटरों के नाम भी गलती से कट गए, जो अल्पसंख्यक और पिछड़े इलाकों में ज्यादा प्रभावित कर सकता है।

आने वाले चुनाव पर क्या प्रभाव होंगे?

उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, और यह SIR प्रक्रिया उससे पहले की सबसे बड़ी तैयारी है। इसके प्रभाव इस प्रकार हो सकते हैं:

पॉजिटिव प्रभाव: साफ वोटर लिस्ट से चुनाव ज्यादा निष्पक्ष होंगे। फर्जी और डुप्लिकेट वोटरों के हटने से वोटिंग फ्रॉड कम होगा, जो पिछले चुनावों में एक बड़ा मुद्दा था। 2024 लोकसभा चुनाव में यूपी में NDA को 36 सीटें मिली थीं, जबकि INDI गठबंधन को 43, लेकिन वोटों में NDA आगे था। अब साफ लिस्ट से असली वोटरों की भागीदारी बढ़ेगी, और राजनीतिक पार्टियां ज्यादा पारदर्शी कैंपेनिंग पर फोकस करेंगी। महिलाओं की भागीदारी पर भी असर पड़ सकता है, लेकिन ECI का कहना है कि यह लंबे समय से जमा 'डेड वुड' को हटाने का काम है, जो डेमोक्रेसी को मजबूत करेगा।

नेगेटिव प्रभाव: कुछ वैध वोटरों को नाम जुड़वाने में परेशानी हो सकती है, खासकर ग्रामीण और माइग्रेंट इलाकों में। विपक्ष ने इसे 'रिगिंग' का आरोप लगाया है, जैसे कि कुछ सीटों पर डिलीशंस जीत के मार्जिन से ज्यादा हैं। इससे 2027 चुनाव में वोटर टर्नआउट कम हो सकता है अगर लोग समय पर अपडेट नहीं कराते। साथ ही, राजनीतिक पार्टियां अब BLO और पार्टी एजेंट्स के साथ मिलकर वेरिफिकेशन पर फोकस करेंगी, जो कैंपेनिंग को प्रभावित करेगा।

ओवरऑल: यह प्रक्रिया यूपी जैसे बड़े राज्य में चुनावी सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर ठीक से लागू हुई, तो 2027 चुनाव ज्यादा विश्वसनीय होंगे, लेकिन ECI को सुनिश्चित करना होगा कि कोई वैध वोटर छूट न जाए।

 वोटर अपनी डिटेल्स eci.gov.in या ECINET ऐप पर चेक कर सकते हैं। अगर नाम मिसिंग है, तो तुरंत फॉर्म सबमिट करें। यह अभियान अन्य राज्यों जैसे तमिलनाडु (15%) और गुजरात (14.5%) में भी चल रहा है, लेकिन यूपी में स्केल सबसे बड़ा है।

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