PDA पंचांग लांच कर अखिलेश ने चला नया दांव, क्या 2027 में भाजपा को हर घर से चुनौती?
पंचांग को लेकर भाजपा ने लगाया विभाजन का आरोप
Daily News Mirror| Uttar Pradesh News
लखनऊ, 6 जनवरी 2026: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में एक नई पहल के तहत 'समाजवादी पीडीए पंचांग-2026' का विमोचन किया है। यह पंचांग PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज को एकजुट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, खासकर 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर। पंचांग का विमोचन 3 जनवरी 2026 को लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया सभागार में किया गया, जहां अखिलेश ने PDA की सार्थकता पर जोर दिया।
पंचांग का प्रकाशन सपा के प्रदेश सचिव और अखिल भारतीय चौरसिया महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय चौरसिया ने किया है। इसमें PDA समाज के महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि, राष्ट्रीय तथा ऐतिहासिक दिवसों का विस्तृत उल्लेख है। साथ ही, रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आवश्यक कालम भी शामिल किए गए हैं, जैसे तिथि, वार, नक्षत्र आदि। सपा प्रवक्ता सुनील साजन ने इसे एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया और कहा कि इसके माध्यम से PDA महापुरुषों की विरासत को आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे PDA गठबंधन और मजबूत होगा। सपा नेता उदयवीर सिंह ने जोर देकर कहा कि पंचांग को हर घर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य समाज को जागरूक और एकजुट करना है।
अखिलेश यादव ने विमोचन समारोह में PDA की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि PDA समाज की एकता ही राज्य की प्रगति की कुंजी है और भाजपा PDA के खिलाफ है, जो आरक्षण को खुलेआम नजरअंदाज करती है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे 2027 चुनावों की तैयारी में जुट जाएं और भाजपा की साजिशों से सतर्क रहें। यह लॉन्च सपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा लगता है, जहां PDA वोट बैंक को मजबूत करने पर फोकस है।
हालांकि, इस पंचांग पर विवाद भी छिड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने आरोप लगाया कि सपा ने अल्पसंख्यकों के साथ धोखा किया है और पंचांग में अल्पसंख्यकों को पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया। उन्होंने पूछा, "अब PDA का 'ए' यानी अल्पसंख्यक क्या कहेगा?" भाजपा राज्य अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि अखिलेश यादव पहले PDA का फुल फॉर्म स्पष्ट करें, क्योंकि कभी-कभी वे 'पी' और 'ए' की व्याख्या अलग-अलग तरीके से करते हैं। भाजपा का कहना है कि यह धार्मिक तुष्टिकरण का प्रयास है और सपा की PDA परिभाषा अस्पष्ट है।
सपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पंचांग PDA परिवार को समर्पित है और इसका उद्देश्य किसी विशेष समुदाय का तुष्टिकरण नहीं, बल्कि सभी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों की एकता है। वाराणसी में सपा नेता अजय चौरसिया ने बताया कि अखिलेश यादव पंचांग देखकर बहुत प्रसन्न हुए और इसे सकारात्मक कदम माना।
यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ सकती है, जहां सपा PDA फॉर्मूले पर दांव लगा रही है, जबकि भाजपा इसे विभाजनकारी बता रही है। आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं, जो 2027 चुनावों की दिशा तय कर सकती हैं।
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