देशभर के लोको पायलटों का अनोखा विरोध: 48 घंटे भूखे पेट चलाएंगे ट्रेन, 10 सूत्रीय मांगों पर अड़े

Dec 3, 2025 - 18:11
Dec 3, 2025 - 20:14
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देशभर के लोको पायलटों का अनोखा विरोध: 48 घंटे भूखे पेट चलाएंगे ट्रेन, 10 सूत्रीय मांगों पर अड़े
फोटो: भूख हड़ताल पर बैठे लोको पायलट

Daily News Mirror| Railway News

नई दिल्ली, 3 दिसंबर 2025 (स्पेशल डेस्क): भारतीय रेलवे के लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के आह्वान पर देशभर के करीब 1.20 लाख लोको रनिंग स्टाफ ने मंगलवार सुबह से 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इस दौरान वे बिना कुछ खाए-पिए अपनी ड्यूटी पर तैनात रहेंगे और ट्रेनें चलाते रहेंगे, लेकिन विरोध के रूप में भोजन त्यागेंगे। यह आंदोलन रेल सेवाओं को बाधित किए बिना लोको पायलटों की कठिनाइयों को उजागर करने का प्रयास है।

हड़ताल मंगलवार सुबह 8 बजे शुरू हुई और गुरुवार सुबह 8 बजे तक चलेगी। भोपाल, जबलपुर, कोटा, धनबाद, हिसार, मुजफ्फरपुर और अन्य मंडलों में हजारों लोको पायलट लोको लॉबी के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। एसोसिएशन के अनुसार, लोको पायलटों को लंबे ड्यूटी घंटे, लगातार मानसिक दबाव और अपर्याप्त भत्तों के कारण 'मशीन की तरह' काम करना पड़ता है, जिससे उनकी सेहत और सुरक्षा पर असर पड़ रहा है। एक लोको पायलट ने कहा, "हम ट्रेनें तो चलाते रहेंगे, लेकिन खाली पेट। यह हमारी मजबूरी नहीं, बल्कि मांगों को पूरा करने की अपील है।"

10 प्रमुख मांगें जो हलचल मचा रही हैं

हड़ताल के केंद्र में 10 सूत्रीय मांग पत्र है, जिसमें वेतन भत्तों, विश्राम और कार्यभार से जुड़ी शिकायतें शामिल हैं। मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  • माइलेज भत्ते में 25% वृद्धि: यात्रा भत्ते के अनुपात में किलोमीटर भत्ते को तुरंत बढ़ाया जाए।
  • किलोमीटर भत्ते का 70% आयकर मुक्त: वर्तमान में कर का बोझ लोको पायलटों पर असहनीय है।
  • आवधिक विश्राम (पीआर) 46 घंटे सुनिश्चित: वर्तमान 16+30 घंटे का नियम सख्ती से लागू हो, ताकि थकान कम हो।
  • दो से अधिक लगातार नाइट ड्यूटी न हो: रात की ड्यूटी से मानसिक तनाव बढ़ता है, इसलिए सीमा तय की जाए।
  • 50% महंगाई भत्ता (डीए) बहाली: महंगाई के हिसाब से डीए को 50% तक बढ़ाया जाए।
  • 8 घंटे की अधिकतम ड्यूटी: वर्तमान में 10-12 घंटे की ड्यूटी से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।
  • सहायक लोको पायलटों की भर्ती: स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए तत्काल भर्ती।
  • ट्रेनिंग और सुरक्षा उपकरण: बेहतर ट्रेनिंग और सुरक्षा गियर उपलब्ध कराए जाएं।
  • ओवरटाइम भत्ता दोगुना: अतिरिक्त काम के लिए उचित मुआवजा।
  • पेंशन और कल्याण योजनाएं: सेवानिवृत्ति लाभों में सुधार।

कुछ रिपोर्टों में मांगों की संख्या 7 या 9 बताई गई है, लेकिन AILRSA के आधिकारिक बयान के अनुसार यह 10 हैं। एसोसिएशन का दावा है कि ये मांगें वर्षों से लंबित हैं और रेल मंत्रालय से वार्ता के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया: कोई बाधा नहीं, लेकिन वार्ता का वादा

रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हड़ताल के कारण ट्रेन सेवाओं में कोई व्यवधान नहीं आया है। सभी ट्रेनें समय पर चल रही हैं, क्योंकि लोको पायलट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। भोपाल मंडल के एक अधिकारी ने बताया, "हम लोको पायलटों की मांगों से सहमत हैं और उच्च स्तर पर वार्ता की जा रही है। जल्द ही समाधान निकाला जाएगा।" हालांकि, अभी तक रेल मंत्री या केंद्रीय स्तर पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

यह आंदोलन रेलवे के रनिंग स्टाफ की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोको पायलटों की थकान ही कई रेल दुर्घटनाओं का कारण बनती है। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगले चरण में और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

रेल यात्रियों से अपील की गई है कि वे अपनी यात्रा योजनाओं पर नजर रखें, हालांकि फिलहाल कोई बदलाव नहीं है। यह हड़ताल न केवल लोको पायलटों की लड़ाई है, बल्कि पूरे रेलवे सिस्टम की कार्यकुशलता को मजबूत करने का प्रयास भी। अधिक अपडेट के लिए बने रहें।

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