यूपी में दरोगा से सीओ बने ऋषिकांत शुक्ला ने 10 साल में की 100 करोड़ से ज्यादा की काली कमाई, खुलासा होने के बाद हुए सस्पेंड

Nov 4, 2025 - 21:39
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यूपी में दरोगा से सीओ बने ऋषिकांत शुक्ला ने 10 साल में की 100 करोड़ से ज्यादा की काली कमाई, खुलासा होने के बाद हुए सस्पेंड
फोटो: ऋषिकांत शुक्ला (CO)

Daily News Mirror| Rishikant Shukla News 

कानपुर/मैनपुरी, 4 नवंबर 2025 (दीपक शर्मा/विशेष संवाददाता): उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार का एक और काला अध्याय सामने आया है। मैनपुरी के भोगांव थाना क्षेत्र में तैनात सर्किल ऑफिसर (सीओ) ऋषिकांत शुक्ला को आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोप में निलंबित कर दिया गया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट के आधार पर खुलासा हुआ है कि कानपुर में लंबी तैनाती के दौरान उन्होंने करीब 100 करोड़ रुपये की अवैध और बेनामी संपत्ति अर्जित की। इस मामले में उनका नाम जेल में बंद कुख्यात वकील अखिलेश दुबे के अपराधी गिरोह से जुड़ाव के लिए भी सामने आया है।शुरुआती करियर से लेकर अवैध कमाई तक का सफरऋषिकांत शुक्ला ने 1998 में उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक (दरोगा) के पद पर जॉइनिंग की थी। 

शुरुआती आठ वर्ष (1998-2006) वे कानपुर में ही उपनिरीक्षक के रूप में तैनात रहे। इसके बाद दिसंबर 2006 से 2009 तक निरीक्षक के पद पर प्रमोशन मिला और वे कानपुर में ही बने रहे। कुल मिलाकर कानपुर में उनकी सेवा लगभग 11 वर्ष चली। 

 सीओ पद पर पदोन्नति के बाद उन्हें उन्नाव जिले में भेजा गया, जहां से हाल ही में मैनपुरी के भोगांव क्षेत्र में तैनाती मिली।एसआईटी जांच के अनुसार, इसी कानपुर पोस्टिंग के दौरान शुक्ला ने अस्वाभाविक तरीके से संपत्ति का साम्राज्य खड़ा कर लिया। जांच में 12 स्थानों पर मौजूद संपत्तियों का बाजार मूल्य करीब 92 करोड़ रुपये आंका गया है।

 इनमें कानपुर के आर्यनगर इलाके में 11 दुकानें प्रमुख हैं, जो उनके पड़ोसी देवेंद्र दुबे के नाम पर रजिस्टर्ड हैं। सभी संपत्तियां शुक्ला के पैन नंबर से जुड़ी पाई गईं। इसके अलावा तीन अन्य जगहों पर संपत्तियां हैं, जिनके अभिलेखीय साक्ष्य नहीं मिले। गोपनीय स्रोतों के मुताबिक, ये संपत्तियां परिवार, रिश्तेदारों और साझेदारों के नाम पर बेनामी रूप से खरीदी गईं।अखिलेश दुबे गिरोह से गहरा रिश्ता: फर्जी केसों से वसूली का खेलजांच का आधार बना कानपुर का एक पुराना मामला, जिसमें अखिलेश दुबे नामक वकील पर बीजेपी नेता सतीश सतीजा को फंसाने के लिए फर्जी रेप केस गढ़ने का आरोप लगा था। तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार के निर्देश पर दुबे को जेल भेजा गया। 

 एसआईटी ने खोजा कि दुबे का गिरोह पुलिसकर्मियों, पत्रकारों और वकीलों का जाल बुन चुका था, जिसमें ऋषिकांत शुक्ला प्रमुख मददगार थे। दुबे के बेटे और भतीजे के साथ मिलकर शुक्ला ने कंस्ट्रक्शन कंपनी भी चलाई, जिससे जमीन हड़पने और वसूली के धंधे फले-फूले।अखिलेश दुबे गिरोह के 10 पुलिसकर्मियों की सूची में शुक्ला का नाम प्रमुखता से शामिल है। जांच एजेंसी का दावा है कि दुबे जेल से ही अपने नेटवर्क को चला रहा था, और शुक्ला जैसे अफसरों की मदद से फर्जी केसों से पैसे ऐंठे जाते थे।निलंबन और विजिलेंस जांच: योगी सरकार का सख्त रुख3 नवंबर 2025 को गृह विभाग ने शुक्ला के खिलाफ निलंबन आदेश जारी किया। अपर पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) की सिफारिश पर शासन सचिव जगदीश ने प्रमुख सचिव (विजिलेंस) को पत्र लिखकर तत्काल जांच के निर्देश दिए।

 विजिलेंस विभाग ने शुक्ला के खिलाफ औपचारिक जांच शुरू कर दी है, जिसमें उनकी सभी संपत्तियों का सत्यापन होगा। यदि आरोप साबित हुए, तो एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।निलंबित सीओ ने सभी आरोपों को "बेबुनियाद" बताते हुए खुद का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि संपत्तियां वैध स्रोतों से अर्जित हैं, लेकिन जांच में अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।सोशल मीडिया पर हंगामा: जनता की नाराजगीसोशल मीडिया पर इस खबर ने तहलका मचा दिया है। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर कई यूजर्स ने पोस्ट शेयर कर पुलिस सुधार की मांग की। एक यूजर ने लिखा, "कानपुर में 10 साल की सर्विस में 100 करोड़? ये तो खुला लूट का खेल है!" वहीं, एक अन्य पोस्ट में कहा गया, "अखिलेश दुबे जैसे अपराधियों के साथ मिलकर खाकी बेचने वाले अफसरों पर सख्ती जरूरी।"

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