लखनऊ में फर्जी IAS का पर्दाफाश: 6 साल की तलाश के बाद डॉ. विवेक मिश्रा गिरफ्तार, 150 लोगों से ठगे 80 करोड़
Daily News Mirror| Lucknow News
लखनऊ, 17 अक्टूबर 2025 – उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। खुद को गुजरात कैडर का IAS अधिकारी बताने वाले डॉ. विवेक मिश्रा को चिनहट पुलिस ने गुरुवार को कमता तिराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया। छह साल से CID की तलाश का शिकार यह जालसाज 150 से अधिक लोगों को सरकारी नौकरी का लालच देकर करीब 80 करोड़ रुपये ठग चुका था। पुलिस जांच में सामने आया है कि मिश्रा ने न केवल नौकरी के नाम पर ठगी की, बल्कि दूसरों को फर्जी डिप्टी SP तक बनाने का जाल भी बिछाया था।
गिरफ्तारी का खुलासा: सुप्रीम कोर्ट वकील की शिकायत से शुरू हुई जांच
गिरफ्तारी की कहानी सुप्रीम कोर्ट के वकील डॉ. आशुतोष मिश्रा से जुड़ी है। आशुतोष ने बताया कि जून 2018 में उनके रिश्तेदारों के जरिए विवेक मिश्रा से मुलाकात हुई। मिश्रा ने खुद को 2014 बैच का IAS अधिकारी और गुजरात सरकार में प्रधान सचिव बताया। इतना ही नहीं, उसने दावा किया कि उसकी बहनें गुजरात कैडर की IPS अधिकारी हैं। नौकरी दिलाने के नाम पर आशुतोष के जूनियर वकीलों सहित कई लोगों से पैसे ऐंठे गए।
जब ठगी का शक हुआ, तो आशुतोष ने अपने जूनियर अधिवक्ताओं के साथ मिलकर विवेक की सच्चाई का पता लगाया। जांच में पता चला कि मिश्रा झारखंड के बोकारो जिले का निवासी है और असल में डॉक्टर है, IAS का तो दूर, सरकारी नौकरी से भी इसका कोई लेना-देना नहीं। आशुतोष की शिकायत पर मामला पहले स्थानीय थाने पहुंचा, लेकिन बाद में CID को सौंप दिया गया। CID इंस्पेक्टर रमेश चंद्र तिवारी की अगुवाई में छह साल तक चली तलाश गुरुवार को सफल हुई।
पुलिस ने बताया कि विवेक को कमता बस स्टेशन के पास से दबोचा गया। पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर युवतियों और सीधे-सादे लोगों को निशाना बनाता था। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 'IAS Vivek Mishra' जैसे नामों से प्रोफाइल बनाकर वह सरकारी कार्यक्रमों की फोटो शेयर करता और विश्वास जीतता। फिर नौकरी, प्रमोशन या निवेश के नाम पर पैसे ऐंठ लेता।
ठगी का जाल: कई राज्यों में फैला नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, विवेक मिश्रा का जाल उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात, झारखंड, बिहार और दिल्ली तक फैला था। वह सरकारी नौकरी के अलावा IPS और डिप्टी SP जैसे पदों का लालच भी देता था। एक पीड़ित ने बताया कि मिश्रा ने उन्हें 'गुजरात कैडर में डिप्टी SP' बनाने का वादा किया और 25 लाख रुपये ऐंठ लिए। कुल मिलाकर 150 से ज्यादा शिकार हुए, जिनमें ज्यादातर युवा और महिलाएं शामिल हैं। ठगी की रकम 80 करोड़ के आसपास बताई जा रही है।
पुलिस अब उसके बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और संपत्तियों की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में कई फर्जी दस्तावेज, आधार कार्ड और बैंक कार्ड बरामद हुए हैं। CID का मानना है कि मिश्रा का नेटवर्क और बड़ा हो सकता है, जिसमें उसके साथी भी शामिल हैं। सोशल मीडिया पोस्ट्स से भी साफ होता है कि यह गिरफ्तारी सोशल प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो चुकी है, जहां लोग इसे 'फर्जी चमक का अंत' बता रहे हैं।
पुलिस की सतर्कता: फर्जी अधिकारियों पर नकेल कसने की मुहिम
यह गिरफ्तारी लखनऊ पुलिस के लिए बड़ी सफलता है, खासकर तब जब हाल ही में शहर में फर्जी IAS सौरभ त्रिपाठी का मामला सामने आया था। हालांकि वह मामला अलग था, लेकिन यह घटना फर्जी अधिकारियों के बढ़ते जाल को उजागर करती है। लखनऊ के डीसीपी (क्राइम) ने कहा, "हम सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और पीड़ितों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई कर रहे हैं। फर्जी प्रोफाइल्स की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है।"विवेक मिश्रा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। कोर्ट में पेशी के बाद रिमांड लिया जाएगा, ताकि उसके साथियों का पता लगाया जा सके।
पीड़ितों के लिए संदेश: सावधानी बरतें, जागरूक रहें
यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि नौकरी या निवेश के नाम पर आने वाले 'बड़े अधिकारियों' के दावों पर भरोसा करने से पहले सत्यापन जरूरी है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकारी नौकरियों के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल्स जैसे UPSC या राज्य लोक सेवा आयोग पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल्स की पहचान के लिए रिवर्स इमेज सर्च और वेरिफिकेशन टूल्स का इस्तेमाल करें।
लखनऊ पुलिस ने पीड़ितों से अपील की है कि वे आगे आएं और अपनी शिकायत दर्ज कराएं, ताकि न्याय मिल सके। यह गिरफ्तारी न केवल एक अपराधी को सलाखों के पीछे पहुंचाती है, बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी देती है।
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