दिवाली पर अखिलेश यादव का विवादास्पद बयान: 'दीये-मोमबत्ती पर खर्च क्यों? क्रिसमस से सीखो', भाजपा ने ठहराया हिंदू-विरोधी

Oct 19, 2025 - 00:00
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दिवाली पर अखिलेश यादव का विवादास्पद बयान: 'दीये-मोमबत्ती पर खर्च क्यों? क्रिसमस से सीखो', भाजपा ने ठहराया हिंदू-विरोधी
फोटो: दिवाली के अवसर पर मीडिया को संबोधित करते सपा सुप्रीमो

Daily News Mirror| Uttar Pradesh News 

लखनऊ, 18 अक्टूबर 2025 (स्पेशल रिपोर्ट): रामनगरी अयोध्या में दीपोत्सव की भव्य तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दीपावली पर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा दिया है। उन्होंने अयोध्या दीपोत्सव में दीयों के बजाय मोमबत्तियां जलाने और उनकी संख्या में कमी को निशाना बनाते हुए सवाल उठाया कि 'दीये-मोमबत्ती पर पैसा क्यों बर्बाद करें?'। साथ ही, उन्होंने क्रिसमस की जगमगाती रोशनी का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे सीख लेनी चाहिए। इस बयान पर भाजपा ने तीखा प्रहार किया है, जबकि सोशल मीडिया पर इसे 'हिंदू-विरोधी' करार देकर निंदा की जा रही है।

दीपोत्सव की भव्यता और बयान का संदर्भ

अयोध्या में हर साल दीपावली से एक दिन पहले आयोजित होने वाले दीपोत्सव का यह नौवां संस्करण 19 अक्टूबर को चरम पर पहुंचेगा। इस बार सरयू नदी के 56 घाटों पर करीब 26 लाख 11 हजार दीयों की रोशनी जगमगाएगी, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में मोमबत्तियों के उपयोग और दीयों की संख्या में मामूली कमी का जिक्र है। आयोजन में 2100 वैदिक विद्वान, 1100 ड्रोन शो, 33 हजार स्वयंसेवक, पांच देशों की रामलीला और पुष्पक विमान का प्रदर्शन शामिल है। 2017 में शुरू हुए इस उत्सव की शुरुआत में मात्र 1.71 लाख दीये थे, जो अब 15 गुना बढ़ चुके हैं। इस वर्ष यह राम की पैड़ी से आगे राजघाट, गुप्तारघाट और लक्ष्मण किला घाट तक विस्तारित हो गया है। सरयू घाट पर 2100 आचार्यों द्वारा सामूहिक आरती भी होगी।

ऐसे में शनिवार को लखनऊ के सपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव से एक पत्रकार ने दीपोत्सव में मोमबत्तियों के उपयोग और दीयों की संख्या घटने पर सवाल किया। जवाब में अखिलेश ने कहा, "मैं कोई सुझाव नहीं देना चाहता, लेकिन भगवान राम के नाम पर एक सुझाव जरूर देना चाहता हूं।" आगे उन्होंने जोड़ा, "पूरी दुनिया में क्रिसमस के दौरान सभी शहर जगमगा उठते हैं और यह सिलसिला महीनों तक चलता है। हमें उनसे सीखना चाहिए। हमें दीयों और मोमबत्ती पर क्यों खर्च करना और इतना दिमाग लगाना? हम इस सरकार से क्या उम्मीद कर सकते हैं? इसे हटा देना चाहिए। हमारी सरकार आएगी तो बहुत सुंदर रोशनी कराएंगे हम लोग।"अखिलेश का यह बयान न केवल दीपोत्सव की परंपरा पर सवाल उठाता है, बल्कि हिंदू त्योहार की तुलना ईसाई पर्व से करते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने साथ ही योगी सरकार पर बिजली कटौती का भी तंज कसा, कहा कि 'यह निकम्मी सरकार है, इससे बिजली की उम्मीद मत करो।' 

भाजपा की कड़ी निंदा: 'राम मंदिर विरोधी का पुराना इतिहास'

अखिलेश के बयान पर भाजपा ने फौरन पलटवार किया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर कहा, "राम मंदिर आंदोलन का विरोध करने, अयोध्या को वर्षों तक अंधेरे में रखने और यहां तक कि राम भक्तों पर गोलियां चलवाने पर गर्व महसूस करने वाली पार्टी अब दीपोत्सव के लिए शहर की सजावट का विरोध कर रही है। जब उन्होंने सैफई में जश्न मनाया, जिससे आम लोगों को कोई फायदा नहीं हुआ, तो उन्हें गर्व महसूस हुआ। लेकिन अयोध्या में, जहां हजारों छोटे-मोटे दुकानदार रोजी-रोटी कमा रहे हैं, कुछ लोग असंतोष जाहिर कर रहे हैं।" भाजपा ने इसे सपा का 'हिंदू-विरोधी चरित्र' बताया और कहा कि यह राम मंदिर निर्माण के बाद भी जारी है।

सपा की ओर से अब तक कोई औपचारिक सफाई नहीं आई है, लेकिन पार्टी के कुछ समर्थक इसे 'व्यंग्य' बता रहे हैं। एक सपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अखिलेश का इशारा वेस्टेज से बचने और स्थायी रोशनी पर था, न कि त्योहार का विरोध।

सोशल मीडिया पर मचा बवाल: #AkhileshYadav ट्रेंडिंग

अखिलेश का बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #AkhileshYadav और #Diwali2025 हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे 'हिंदू-विरोधी मानसिकता' करार दिया। उदाहरण के लिए, यूजर @AbhishekRprts ने लिखा, "अखिलेश यादव की हिन्दूविरोधी मानसिकता का चेहरा एक बार फिर सामने आया।" वहीं, @sarita25148177 ने पोस्ट किया, "सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दीवाली को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दीए और मोमबत्ती पर पैसा बर्बाद मत करो, क्रिसमस से कुछ सीखना चाहिए।" न्यूज हैंडल्स जैसे @aajtak और @Live_Hindustan ने भी इसे प्रमुखता से कवर किया।

कई पोस्ट्स में यूजर्स ने सवाल उठाया कि 'हिंदू त्योहारों से दिक्कत क्यों?'। एक यूजर @AJAYKUM95107739 ने लिखा, "आख़िर इनको हिंदुओं के त्योहारों से दिक्कत क्या है??? सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दीवाली को लेकर विवादित बयान दिया है।" कुल मिलाकर, 20 से अधिक प्रमुख पोस्ट्स में ज्यादातर निंदा ही दिखाई दी।

व्यापक प्रभाव: चुनावी संदर्भ में सियासी तीर?

यह बयान उत्तर प्रदेश की सियासत में नया विवाद पैदा कर सकता है, खासकर जब दीपावली जैसे प्रमुख हिंदू पर्व पर फोकस है। सपा ने हाल ही में उपचुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन ऐसे बयान भाजपा को हिंदू वोटों को एकजुट करने का मौका दे सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश का इशारा शायद सरकारी खर्च पर था, लेकिन शब्दों का चयन विवादास्पद साबित हुआ। दीपोत्सव की सफलता के बीच यह बयान आयोजन की भव्यता पर एक अनचाही छाया डाल गया है।

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