पाक-अफगान सीमा पर युद्ध जैसे हालात: तालिबान ने पाक के 58 सैनिक मार गिराए, पाकिस्तान ने 200 तालिबानियों को मारने का किया दावा

Oct 13, 2025 - 14:12
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पाक-अफगान सीमा पर युद्ध जैसे हालात: तालिबान ने पाक के 58 सैनिक मार गिराए, पाकिस्तान ने 200 तालिबानियों को मारने का किया दावा
तालिबानियों ने कई पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा करने का किया दावा

Daily News Mirror| Pakistan Afganistan War

इस्लामाबाद/काबुल, 13 अक्टूबर 2025: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दुर्गा लाइन पर तनाव चरम पर पहुंच गया है। रविवार रात को तालिबान ने पाकिस्तानी सेना के कई बॉर्डर पोस्ट पर हमला बोल दिया, जिसमें काबुल ने दावा किया है कि 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 30 घायल हो गए। जवाब में पाकिस्तान ने कहा कि उसके 23 सैनिक शहीद हुए, लेकिन 200 से अधिक तालिबानी लड़ाकों को मार गिराया गया। दोनों पक्षों के परस्पर आरोपों के बीच प्रमुख बॉर्डर क्रॉसिंग बंद हो गए हैं, जिससे व्यापार ठप और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ गई है।

घटना का विवरण: रातभर चली गोलीबारी

घटना की शुरुआत 11-12 अक्टूबर की रात को हुई, जब तालिबान ने हेलमंड, कंधार, जाबुल, पक्तिका, पक्तिया, खोस्त, नंगरहर और कुनार प्रांतों में पाकिस्तानी सेना के 25 से अधिक बॉर्डर पोस्ट पर समन्वित हमला किया। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि यह हमला पाकिस्तान के हालिया एयरस्ट्राइक्स का जवाब था, जिसमें काबुल और पक्तिका में विस्फोट हुए थे। अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हेलमंड के बह्रामचा जिले में तीन पोस्ट कब्जे में लिए गए और पाकिस्तानी हथियारों की भारी मात्रा लूटी गई। हमलों में ग्राउंड असॉल्ट, एयरस्ट्राइक्स, रोडसाइड बम विस्फोट और भारी हथियारों का इस्तेमाल हुआ।

पाकिस्तानी सेना ने इसे "अनप्रोवोक्ड अटैक" बताते हुए जवाबी कार्रवाई की, जिसमें उन्होंने 19 अफगान पोस्ट और आतंकी ठिकानों पर कब्जा कर लिया। आर्मी के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि तालिबान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने संयुक्त रूप से हमला किया था। टोरखम, चमन, अंगूर अड्डा, खरलाची, घुलाम खान, बाजौर, कुर्रम, डिर, चित्राल और बरामचा जैसे सात प्रमुख बॉर्डर पॉइंट्स पर रातभर गोलीबारी चली। पाकिस्तान ने तीन अफगान क्वाडकॉप्टर्स को भी मार गिराया।

परस्पर दावों की जंग: हताहतों पर विवाद

दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल उलट हैं। तालिबान ने कहा कि उसके "प्रतिशोधी ऑपरेशन" में 58 पाक सैनिक मारे गए, जिसमें हेलमंड में 15 शामिल हैं, जबकि पाकिस्तान ने केवल 23 सैनिकों की मौत की पुष्टि की। दूसरी ओर, इस्लामाबाद ने दावा किया कि 200 से अधिक तालिबानी और उनके सहयोगी मारे गए, जबकि काबुल ने केवल 9 तालिबानी लड़ाकों की मौत और 16 घायलों का उल्लेख किया। स्वतंत्र सत्यापन संभव नहीं होने से ये आंकड़े प्रचार का हिस्सा लगते हैं।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा, "पाकिस्तान की रक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा। हर उकसावे का मजबूत जवाब दिया जाएगा।" वहीं, अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी ने नई दिल्ली में कहा, "हम शांति चाहते हैं, लेकिन अगर कोई शांति नहीं चाहता, तो अफगानिस्तान अपनी जमीन और हवाई क्षेत्र की रक्षा करने में सक्षम है।" मुत्तकी की भारत यात्रा के दौरान यह घटना होने से पाकिस्तान ने भारत पर आतंकवाद प्रायोजित करने का आरोप लगाया, जिसे नई दिल्ली ने खारिज कर दिया।

बैकग्राउंड: पुराना विवाद, नई आग

यह संघर्ष दुर्गा लाइन सीमा विवाद पर आधारित है, जो 1893 में ब्रिटिश काल में खींची गई थी और अफगानिस्तान इसे मान्यता नहीं देता। पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान सरकार टीटीपी को शरण दे रही है, जो 2021 से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में सैकड़ों पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या कर चुका है। काबुल इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि टीटीपी पाकिस्तान का आंतरिक मामला है। हाल के हफ्तों में टीटीपी के हमले बढ़े हैं, जिसमें 7-8 अक्टूबर को ओरकजई में 11 पाक सैनिक मारे गए। 10 अक्टूबर को काबुल में पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक्स का दावा किया गया, जो टीटीपी नेता नूर वाली महसूद को निशाना बनाने का प्रयास था।

प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय अपील

संघर्ष के चलते टोरखम, चमन और तीन अन्य बॉर्डर क्रॉसिंग बंद हो गए, जिससे व्यापार रुक गया और हजारों नागरिक फंस गए। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते (सितंबर 2025) से जुड़ा हो सकता है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कतर और सऊदी अरब ने शत्रुता रोकने की अपील की, जिसे तालिबान ने स्वीकार कर लिया। ईरान ने मध्यस्थता की पेशकश की, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिस्र शिखर सम्मेलन से लौटकर मध्यस्थता का वादा किया। विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष चीन, रूस और ईरान के हितों को प्रभावित कर सकता है, और नागरिकों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है।

दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर डिप्लोमेसी विफल रही, तो यह पूर्ण युद्ध में बदल सकता है।

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