नेपाल में सोशल मीडिया बैन के बाद भड़की जनता, प्रोटेस्ट में 20 की मौत सैकड़ों घायल

Sep 8, 2025 - 19:58
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नेपाल में सोशल मीडिया बैन के बाद भड़की जनता, प्रोटेस्ट में 20 की मौत सैकड़ों घायल
फोटो: X से

Daily News Mirror| Nepal

काठमांडू, 8 सितंबर 2025 - नेपाल में सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध ने देश में एक अभूतपूर्व जनांदोलन को जन्म दिया है, जिसे अब "जेन-जेड क्रांति" के रूप में जाना जा रहा है। सरकार द्वारा फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप, और ट्विटर (एक्स) सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के फैसले ने युवाओं के बीच गुस्से की आग भड़का दी। यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भ्रष्टाचार, आर्थिक असमानता, और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले के खिलाफ एक बड़े विद्रोह में बदल गया है।

सोशल मीडिया बैन की शुरुआत

4 सितंबर 2025 को नेपाल सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार का तर्क था कि ये प्लेटफॉर्म्स नेपाल के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय में पंजीकरण कराने में विफल रहे। 28 अगस्त को दी गई सात दिन की समय सीमा समाप्त होने के बाद, मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप), अल्फाबेट (यूट्यूब), और एक्स जैसी कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप, नेपाल टेलीकम्यूनिकेशन अथॉरिटी (NTA) ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को इन प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया। 

सरकार ने इस प्रतिबंध को फेक न्यूज, साइबर अपराध, और राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों को रोकने के लिए जरूरी बताया। हालांकि, युवाओं और विपक्ष ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला और सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज दबाने की कोशिश करार दिया।

जेन-जेड का विद्रोह- Gen Z revolution 

8 सितंबर को काठमांडू के मैतीघर मंडला में हजारों युवा सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई, जिसके बाद जेन-जेड प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय झंडे लहराते हुए नारे लगाए, जैसे "भ्रष्टाचार बंद करो, सोशल मीडिया नहीं" और "हमारी स्वतंत्र आवाज हमारा अधिकार है।" यह आंदोलन स्वतंत्र रूप से संगठित था, जिसमें 'हामी नेपाल' जैसे समूहों ने नेतृत्व किया, बिना किसी पारंपरिक राजनीतिक दल के समर्थन के। 

प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन के गेट नंबर 1 और 2 को घेर लिया और कुछ ने परिसर में घुसने की कोशिश की। स्थिति बेकाबू होने पर पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार, लाठीचार्ज, और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। कुछ स्थानों पर हवाई फायरिंग की खबरें भी सामने आईं। इस हिंसक झड़प में 15 से 20 लोगों की मौत और 150 से 250 लोग घायल हुए, जैसा कि विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया।

प्रदर्शनकारियों की मांगेंप्रदर्शनकारी न केवल सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं, बल्कि वे सरकारी भ्रष्टाचार, अधिकारियों की जवाबदेही, डिजिटल स्वतंत्रता, और अभिव्यक्ति की आजादी की बहाली की मांग भी कर रहे हैं। 24 वर्षीय छात्र युजन राजभंडारी ने कहा, “हमें सोशल मीडिया बैन ने झकझोरा, लेकिन हम सिर्फ इसी वजह से नहीं आए। हम उस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, जो नेपाल की संस्थाओं में घुस चुका है।”

20 वर्षीय छात्रा इक्षमा तुमरोक ने कहा, “हम सरकार के तानाशाही रुख के खिलाफ हैं। पहले की पीढ़ियों ने इसे सहा, लेकिन हमारी पीढ़ी इसे खत्म करेगी।”

सरकार का रुख

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्र की स्वतंत्रता और गरिमा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “जो लोग नेपाल में व्यापार करते हैं और पैसा कमाते हैं, उन्हें देश के कानूनों का पालन करना होगा।” सरकार का दावा है कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करती है, लेकिन नियमों का पालन जरूरी है। 

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह प्रतिबंध असहमति को दबाने और सरकार की आलोचना को रोकने की कोशिश है। विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल में लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, और आर्थिक असमानता ने इस आंदोलन को और हवा दी है।

हालात और प्रतिक्रिया

काठमांडू में रात 10 बजे तक कर्फ्यू लागू कर दिया गया, और संसद भवन, राष्ट्रपति, और प्रधानमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई। सेना को भी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया। इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क को अस्थायी रूप से बंद करने की कोशिश की गई, लेकिन युवाओं ने टिकटॉक और रेडिट जैसे वैकल्पिक प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपनी आवाज उठाना जारी रखा।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी बोतलें और लकड़ी की शाखाएं फेंकते नजर आए, जबकि पुलिस आंसू गैस और रबर की गोलियां दाग रही थी। टिकटॉक पर वायरल वीडियो में नेताओं के बच्चों की ऐशो-आराम वाली जिंदगी की तुलना आम नागरिकों की परेशानियों से की जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय चिंता

नेपाल के इस उथल-पुथल ने पड़ोसी देश भारत को भी चिंतित कर दिया है। भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने निगरानी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह आंदोलन और उग्र हुआ, तो यह नेपाल के लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है।

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