उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने से भयंकर तबाही, 4 की मौत, सैकड़ों लापता

Aug 5, 2025 - 16:01
Aug 7, 2025 - 14:17
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उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने से भयंकर तबाही, 4 की मौत, सैकड़ों लापता
उत्तरकाशी में बादल फटने से भारी तबाही

Daily News Mirror| Dehradun

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री धाम के प्रमुख यात्रा पड़ाव धराली में मंगलवार, 5 अगस्त 2025 को सुबह एक भीषण प्राकृतिक आपदा ने तबाही मचा दी। खीर गंगा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बादल फटने से अचानक आई बाढ़ ने धराली गांव और बाजार को अपनी चपेट में ले लिया। इस विनाशकारी बाढ़ में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 50 से 100 लोगों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है। कई लोगों के मलबे में दबे होने की भी सूचना है, जिससे हताहतों की संख्या बढ़ने का खतरा बना हुआ है। 

आपदा का भयावह मंजर

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खीर गंगा नदी में अचानक पानी का तेज सैलाब ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों से नीचे आया, जिसमें बड़े-बड़े पत्थर, मलबा और लकड़ी के लट्ठे भी शामिल थे। इस प्रलयकारी बाढ़ ने धराली बाजार को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। 20 से 25 होटल, होमस्टे और दुकानें मलबे और पानी की चपेट में आकर ध्वस्त हो गए। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे महज 20-30 सेकंड में पूरा बाजार पानी और मलबे में बह गया। लोग चीखते-चिल्लाते हुए मदद की गुहार लगाते नजर आए, लेकिन तेज बहाव के कारण बचने का मौका नहीं मिला। 

 स्थानीय निवासी लक्ष्मण सयाना ने बताया कि खीर गंगा के जलग्रहण क्षेत्र में ऊपरी हिस्से में बादल फटने से यह आपदा आई। बाढ़ का पानी इतना तेज था कि मकान, दुकानें और होटल माचिस की तीलियों की तरह बह गए। धराली गांव, जो गंगोत्री धाम के रास्ते में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा के पास स्थित है, अब मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका है।

राहत और बचाव कार्य

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना और स्थानीय आपदा प्रबंधन टीमें राहत और बचाव कार्य में जुट गई हैं। उत्तरकाशी के जिला मजिस्ट्रेट प्रशांत आर्य ने बताया कि हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और संपत्ति को भारी नुकसान हुआ है। 10 से 12 मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका है, जिन्हें बचाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हर्षिल से सेना और पुलिस की टीमें भटवाड़ी के रास्ते धराली पहुंच चुकी हैं। 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "धराली (उत्तरकाशी) क्षेत्र में बादल फटने से हुए भारी नुकसान का समाचार अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए SDRF, NDRF, जिला प्रशासन और अन्य टीमें युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं। मैं स्थिति की गहन निगरानी कर रहा हूं और ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं।"

गंगोत्री धाम से संपर्क टूटा

बाढ़ के कारण गंगोत्री धाम का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया है। कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे यातायात और तीर्थयात्रा पर भी असर पड़ा है। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे से दूरी बनाए रखने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। 

जलवायु परिवर्तन और अनियोजित विकास का असर

यह आपदा 2025 के मानसून में हिमालयी क्षेत्रों में हुई 30-40 बादल फटने की घटनाओं में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और नदी किनारे अनियोजित निर्माण इस तरह की आपदाओं को और गंभीर बना रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र लगातार प्राकृतिक आपदाओं के खतरे में है, और इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति बनाने की जरूरत है। 

आगे क्या?

प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर निकले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे खराब मौसम को देखते हुए पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा टालें। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नागरिकों से मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेने और किसी भी आपात स्थिति में 112, 1070 या 1077 पर संपर्क करने को कहा है। 

 धराली की इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्कता और बेहतर आपदा प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित किया है। प्रशासन और बचाव दल प्रभावित लोगों को बचाने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इस आपदा का दुखद प्रभाव लंबे समय तक स्थानीय समुदाय पर बना रहेगा।

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