मिर्जापुर: ग्राम प्रधान की बेरहमी से पिटाई, सपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश, थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप
मिर्जापुर, 19 जुलाई 2025: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में एक ग्राम प्रधान के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट का मामला सामने आया है, जिसने समाजवादी पार्टी (सपा) कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। आरोप है कि राजगढ़ थाना प्रभारी रणविजय सिंह और तीन सिपाहियों ने ग्राम प्रधान, जो सपा का सेक्टर प्रभारी भी है, को न केवल गाली-गलौज दी, बल्कि उसकी बेरहमी से पिटाई भी की। इस घटना के बाद सपा कार्यकर्ताओं ने थाना प्रभारी के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है और न्याय की मांग की है।
घटना का विवरण
जानकारी के अनुसार, पीड़ित ग्राम प्रधान पंचायत से संबंधित एक मामले में पैरवी करने के लिए राजगढ़ थाने गया था। इस दौरान थाना प्रभारी रणविजय सिंह ने पहले उसके साथ अभद्र भाषा का उपयोग किया और फिर कथित तौर पर उसकी बेरहमी से पिटाई की। इतना ही नहीं, ग्राम प्रधान पर शांतिभंग का आरोप लगाते हुए चालान कर उसे जेल भेज दिया गया। इस घटना को लेकर सपा कार्यकर्ताओं में भारी रोष है, और उन्होंने इसे पुलिस की दबंगई और सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है।
सपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा
घटना के बाद पीड़ित ग्राम प्रधान ने सपा कार्यालय पहुंचकर पार्टी नेताओं के सामने अपनी आपबीती सुनाई और न्याय की गुहार लगाई। सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह घटना समाजवादी पार्टी के नेताओं अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी से शुरू हुई, जिसके बाद सपा कार्यकर्ता भड़क गए। सपा के स्थानीय नेताओं ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
थाना प्रभारी रणविजय का विवादित इतिहास
बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी रणविजय सिंह को कुछ दिन पूर्व ही कछवा थाने से दबंगई के आरोपों के चलते हटाया गया था। इसके बावजूद, राजगढ़ थाने में उनकी नियुक्ति के बाद भी उनके व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया है। सपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि रणविजय सिंह का व्यवहार अमानवीय और पक्षपातपूर्ण है, जिसके कारण क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है।
सपा की प्रतिक्रिया
सपा कार्यकर्ताओं ने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है। पार्टी के स्थानीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। सपा के जिला नेतृत्व ने भी इस मामले को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है।
पुलिस प्रशासन की चुप्पी
अब तक पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पुलिस और जनता के बीच विश्वास को कमजोर कर रही हैं।
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