गुरुग्राम नगर निगम में लापरवाही का आलम: सीवर समस्या अनसुलझी, मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना
गुरुग्राम (08 मई 2025): गुरुग्राम नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही और मुख्यमंत्री के आदेशों की अनदेखी ने जनता का जीना मुहाल कर दिया है। गांव बेगमपुर खतौला में सीवर ओवरफ्लो की समस्या ने स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है, लेकिन नगर निगम के कार्यकारी अभियंता और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के 15 दिन पहले दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, जिसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को बर्खास्त करने की बात कही गई थी, निगम प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
सीवर समस्या ने बिगाड़ी जिंदगी
बेगमपुर खतौला के निवासियों का कहना है कि सीवर लाइन के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी सड़कों और घरों में घुस रहा है। इससे न केवल बदबू और गंदगी का आलम है, बल्कि मच्छरों और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने बताया, "हमने कई बार नगर निगम में शिकायत की, लेकिन हर बार हमें केवल आश्वासन मिलता है। कार्यकारी अभियंता तो हमारी बात सुनने को भी तैयार नहीं हैं।" एक अन्य निवासी, संगीता देवी ने कहा, "बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्थिति असहनीय हो गई है। सीवर का पानी घरों में घुस रहा है, लेकिन निगम को कोई फर्क नहीं पड़ता।"
मुख्यमंत्री के आदेश बेअसर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पिछले महीने जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में साफ निर्देश दिए थे कि सीवरेज और सफाई से जुड़ी समस्याओं को तत्काल हल किया जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें बर्खास्तगी तक शामिल है। इसके बावजूद, बेगमपुर खतौला में स्थिति जस की तस बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री इस मामले में निगम की ढिलाई से नाराज हैं और जल्द ही बड़े पैमाने पर कार्रवाई की संभावना है।
तबादलों की चर्चा जोरों पर
मानेसर नगरायुक्त के हालिया तबादले के बाद अब गुरुग्राम नगर निगम आयुक्त अशोक कुमार गर्ग के ट्रांसफर की अटकलें भी तेज हो गई हैं। विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यकारी अभियंता और अन्य अधिकारियों की लापरवाही से खफा हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "ऊपर से दबाव बढ़ रहा है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े स्तर पर तबादले और अनुशासनात्मक कार्रवाइयां हो सकती हैं।"
निगम की कार्यशैली पर सवाल
गुरुग्राम नगर निगम की कार्यशैली पहले भी सवालों के घेरे में रही है। हाल ही में, मोहम्मदपुर झाड़सा गांव में सड़क निर्माण और श्मशान घाट के काम में अनियमितताओं के चलते 21 निगम अधिकारियों को विजिलेंस जांच में दोषी पाया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि ठेकेदारों को अधूरे काम के लिए पूरा भुगतान कर दिया गया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी तरह, बंधवाड़ी लैंडफिल साइट पर कूड़ा निस्तारण में लापरवाही के लिए दो एजेंसियों पर तीन करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
जनता की अनसुनी शिकायतें
बेगमपुर खतौला के निवासियों का आरोप है कि कार्यकारी अभियंता न केवल उनकी शिकायतों को अनसुना करते हैं, बल्कि निगम कार्यालय में उनकी बात तक नहीं सुनी जाती। ग्रामीणों ने बताया कि समाधान शिविरों में भी उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकलता। निगम के नए आयुक्त अशोक कुमार गर्ग ने कार्यभार संभालते ही शिकायत निवारण और सफाई व्यवस्था पर जोर देने की बात कही थी, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं दिख रहा।
आगे क्या?
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने भी गुरुग्राम नगर निगम की निष्क्रियता पर सख्त नाराजगी जताई है। हाल ही में, 54 खतरनाक इमारतों के मामले में निगम को 20 मई तक कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। बेगमपुर खतौला के निवासी अब इस उम्मीद में हैं कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से उनकी समस्या का समाधान होगा। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता विकास शर्मा ने कहा, "अगर निगम अब भी नहीं जागा तो हमें सड़कों पर उतरना पड़ेगा।"
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