पहलगाम आतंकी हमले में शहीद कैप्टन शुभम को कानपुर में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, जनसैलाब में दिखा आक्रोश

शुभम की शादी फरवरी 2025 में हुई थी, और वह अपनी पत्नी के साथ पहली बार कश्मीर की वादियों में छुट्टियां मनाने गए थे

Apr 24, 2025 - 15:15
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पहलगाम आतंकी हमले में शहीद कैप्टन शुभम को कानपुर में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, जनसैलाब में दिखा आक्रोश
फोटो: शहीद कैप्टन शुभम द्विवेदी को श्रद्धांजलि देते सीएम योगी आदित्यनाथ

कानपुर, 24 अप्रैल 2025: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस कायराना हमले में कानपुर के सपूत कैप्टन शुभम द्विवेदी शहीद हो गए। गुरुवार को उनके पार्थिव शरीर को जब उनके पैतृक गांव महाराजपुर के हाथीपुर लाया गया, तो हजारों लोगों का जनसैलाब उन्हें अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ा। इस दौरान लोगों ने "पाकिस्तान मुर्दाबाद" और "शुभम अमर रहें" के नारे लगाए, जो पूरे क्षेत्र में गूंजते रहे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शहीद के परिजनों से मिलने उनके घर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया।

शहीद शुभम की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

शुभम द्विवेदी का पार्थिव शरीर बुधवार देर रात विशेष विमान से लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पर पहुंचा था, जहां उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद, ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से शव को कानपुर के हाथीपुर गांव लाया गया। गुरुवार सुबह जैसे ही शहीद की अंतिम यात्रा शुरू हुई, हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। शुभम के तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को देखकर हर आंख नम थी। उनके परिवार, जिसमें उनकी पत्नी, माता-पिता और अन्य रिश्तेदार शामिल थे, का रो-रोकर बुरा हाल था।

स्थानीय लोगों ने शुभम को नम आंखों से याद किया। एक स्थानीय निवासी रमेश तिवारी ने कहा, "शुभम हमारा गर्व था। उसने देश के लिए अपनी जान दी, लेकिन आतंकियों ने कायराना हरकत कर हमारी बहन-बेटियों का सुहाग छीन लिया। सरकार को इसका बदला लेना चाहिए।"

सीएम योगी ने परिवार को बंधाया ढांढस

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह करीब 9:30 बजे शुभम के घर पहुंचे। उन्होंने शहीद के परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। इस दौरान शुभम की पत्नी ऐशान्या योगी से मिलकर फूट-फूटकर रो पड़ीं और आतंकियों से कड़ा बदला लेने की मांग की। योगी ने उन्हें आश्वासन दिया कि भारत सरकार आतंकवाद के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" की नीति पर काम कर रही है और इस हमले के दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा, "जिन्होंने बहन-बेटियों के सामने उनका सिंदूर उजाड़ा, उनसे बदला लिया जाएगा। आतंकियों के जहरीले फन कुचल दिए जाएंगे।"

योगी ने शुभम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, "शुभम का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। यह कायराना हमला आतंकवाद की अंतिम सांसों का सबूत है। भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार शुभम के परिवार के साथ हर कदम पर खड़ी है।"

पाकिस्तान के खिलाफ उबला आक्रोश

शुभम के अंतिम संस्कार के दौरान गंगा किनारे हजारों लोग एकत्र हुए। इस दौरान लोगों का गुस्सा पाकिस्तान के खिलाफ फूट पड़ा। "पाकिस्तान मुर्दाबाद" और "भारत माता की जय" के नारे लगाए गए। कई लोगों ने मांग की कि सरकार पाकिस्तान को इस हमले का कड़ा जवाब दे। शहर में जगह-जगह कैंडल मार्च निकाले गए और आतंकवाद के खिलाफ प्रदर्शन किए गए। लखनऊ में वकीलों ने आतंकवाद का पुतला फूंका, जबकि कानपुर में परिषदीय शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर शुभम को श्रद्धांजलि दी।

पहलगाम हमले की पृष्ठभूमि

22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन घाटी, जिसे "मिनी स्विट्जरलैंड" के नाम से जाना जाता है, में लश्कर-ए-तैयबा के छद्म संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) ने पर्यटकों पर ताबड़तोड़ गोलीबारी की थी। इस हमले में 26 से 28 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। शुभम, जो अपनी पत्नी और परिवार के साथ कश्मीर घूमने गए थे, इस हमले का शिकार बने। आतंकियों ने उनसे उनका नाम पूछा और फिर उनके सिर में गोली मार दी। उनकी पत्नी ने बताया कि आतंकियों ने कहा, "हम तुम्हें जिंदा छोड़ रहे हैं ताकि तुम अपनी सरकार को बताओ कि हमने क्या किया।"

सरकार का कड़ा रुख

पहलगाम हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि आतंकियों को बख्शा नहीं जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह ने श्रीनगर में सुरक्षा समीक्षा बैठक की और पहलगाम का दौरा किया। सरकार ने पाकिस्तान के साथ राजनयिक संबंधों में कटौती, 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने और अटारी चौकी को बंद करने जैसे फैसले लिए। साथ ही, पाकिस्तानी नागरिकों को दक्षेस वीजा छूट योजना के तहत भारत में प्रवेश पर रोक लगा दी गई।

शुभम का परिवार और उनकी यादें

शुभम द्विवेदी कानपुर के महाराजपुर के हाथीपुर गांव के रहने वाले थे। उनके पिता संजय द्विवेदी एक सीमेंट कारोबारी हैं। शुभम की शादी फरवरी 2025 में हुई थी, और वह अपनी पत्नी के साथ पहली बार कश्मीर की वादियों में छुट्टियां मनाने गए थे। एक वीडियो में शुभम अपने परिवार के साथ ताश खेलते और हंसते-मजाक करते दिखे थे, जहां उन्होंने कहा था, "मैं सबको हरा दूंगा।" यह वीडियो अब उनके परिवार और दोस्तों के लिए उनकी आखिरी याद बन गया है।

कैप्टन शुभम द्विवेदी का बलिदान देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके शौर्य और समर्पण को कानपुर और पूरे देश ने सलाम किया। पहलगाम हमले ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ देश को एकजुट किया है। शुभम की शहादत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक निर्दोष लोग आतंक की भेंट चढ़ते रहेंगे। देशवासियों की एक ही मांग है कि सरकार इस हमले का कड़ा जवाब दे और आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंके।

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