घोटाला उजागर किया तो खाई 7 गोलियां, कान पकड़ उठक-बैठक किया तो ट्रांसफर, अब सिस्टम से हारकर IAS रिंकू सिंह ने दिया इस्तीफा
Daily News Mirror| Uttar Pradesh News
लखनऊ, 31 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही (Rinku Singh Rahi) ने मंगलवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया। महज 8 महीने पहले शाहजहांपुर में SDM के रूप में वायरल 'उठक-बैठक' वाले वीडियो के बाद उन्हें राजस्व परिषद में 'अटैच' कर दिया गया था। तब से न कोई फील्ड पोस्टिंग, न कोई जिम्मेदारीपूर्ण काम—सिर्फ वेतन। राही ने इस्तीफे में साफ लिखा: "समांतर व्यवस्था चल रही है, संवैधानिक ढांचे के बाहर। मैं बिना काम के सिर्फ सैलरी लेते रहना नैतिक रूप से गलत मानता हूं।"
यह इस्तीफा महज एक अधिकारी की नाराजगी नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर गंभीर सवाल है। जो अधिकारी 2009 में 83-100 करोड़ के पेंशन-स्कॉलरशिप घोटाले का पर्दाफाश कर अपनी जान पर खेल गया, वही आज 'डेस्क जॉब' पर साइडलाइन कर दिया गया।
घोटाला, गोलियां और जिंदगी की जंग
रिंकू सिंह राही मूल रूप से अलीगढ़ जिले के डोरी नगर के रहने वाले हैं। 2008 में PCS अधिकारी बने और मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के रूप में तैनात हुए। मात्र चार महीने बाद उन्होंने विभाग में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पकड़ीं—छात्रवृत्ति, पेंशन योजनाओं (इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन सहित) में फर्जी लाभार्थी, गलत अकाउंट नंबर और करोड़ों का गबन। जांच में 83 से 100 करोड़ तक का घोटाला सामने आया।
घोटाला उजागर करते ही राही पर हमला हो गया। 26 मार्च 2009 को सुबह बैडमिंटन खेलते समय बदमाशों ने उन पर 7 गोलियां दाग दीं। दो-तीन गोलियां चेहरे पर लगीं, जबड़ा क्षतिग्रस्त, एक आंख की रोशनी चली गई, सुनने की क्षमता प्रभावित हुई। हमला विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों और स्थानीय माफिया की साजिश था। पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें समाजवादी पार्टी के नेता मुकेश चौधरी और विभाग के असिस्टेंट अकाउंटेंट अशोक कश्यप शामिल थे। चार को 10 साल की सजा भी हुई।
राही ने हार नहीं मानी। चेहरे पर निशान, एक आंख अंधी होने के बावजूद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। 16वीं कोशिश में 2021-22 में PwBD (दिव्यांग) कैटेगरी में AIR 683 हासिल कर IAS बने। 2024 में मुजफ्फरनगर (जहां घोटाला उजागर किया था) में जॉइंट मजिस्ट्रेट बनकर लौटे—जिंदगी पूरी गोल लग रही थी।
SDM बने, 36 घंटे में ट्रांसफर—फिर 8 महीने 'बिना काम'
जुलाई 2025 में शाहजहांपुर के पुवायन तहसील में SDM पद संभाला। पहले दिन ही एक क्लर्क को खुले में पेशाब करते देखा तो उन्हें उठक-बैठक करवाई। वकीलों ने सफाई पर हंगामा किया। राही ने खुद वकीलों के सामने कान पकड़कर उठक-बैठक की—वीडियो वायरल हो गया। मात्र 36 घंटे में ट्रांसफर! लखनऊ के राजस्व परिषद में अटैच।
8 महीने तक फील्ड पोस्टिंग नहीं मिली। राही ने कहा—मैं सैलरी लेता हूं, लेकिन जनता की सेवा का मौका नहीं। इस्तीफा 'मॉरल डिसीजन' बताया।
सिस्टम का सच: ईमानदार को डेस्क, भ्रष्ट को फील्ड?
राही का केस यूपी में IAS अधिकारियों के इस्तीफों की लिस्ट में नया नाम जोड़ता है। पिछले दो साल में 9 IAS अधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं। राही जैसे ईमानदार अधिकारी बार-बार साइडलाइन होते हैं—जबकि घोटालेबाज फील्ड पोस्टिंग पर फलते-फूलते हैं। जनता को अब समझना होगा: अगर ईमानदार अधिकारियों का साथ नहीं दिया गया तो कौन जनता की लड़ाई लड़ेगा?
रिंकू सिंह राही की कहानी प्रेरणा भी है और चेतावनी भी। 7 गोलियां झेलकर भी जो नहीं टूटा, वह 'बिना काम' की कुर्सी पर टिक नहीं सका। अब सवाल यह है—क्या यूपी सरकार और जनता इस ईमानदार अधिकारी के साथ खड़ी होगी, या फिर एक और 'सिस्टम' की जीत होगी?
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