सीएम योगी का 'बबुआ' तंज: 12 बजे उठकर क्या सपने देखते हैं? अखिलेश का पलटवार– 'जागते हुए भी मदहोश'
अखिलेश ने माघ मेला को लेकर कहा सुना है कि एक कोई सतुआ बाबा और बथुआ बाबा हैं
Daily News Mirror| UP News
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर 'सुबह की जंग' छिड़ गई है! मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को 'बबुआ' कहकर तंज कसा कि वो 12 बजे सोकर उठते हैं और गरीब बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने की फुर्सत कहां? लेकिन अखिलेश ने ऐसा करारा जवाब दिया कि मानो योगी जी की 'सूर्योदय' वाली बात पर ही 'मदहोशी' का छींटा मार दिया! क्या यह सिर्फ नींद की बहस है या 2027 चुनावों की नींव पड़ रही है? चलिए, पूरी कहानी जानते हैं – हंसी-मजाक के साथ!
सबसे पहले, योगी जी की 'मॉर्निंग अटैक' की बात करें। 25 जनवरी 2026 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में एक छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम चल रहा था। वहां योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए अखिलेश पर निशाना साधा: "12 बजे सोकर उठने वाले बबुआ को कहां फुर्सत थी कि गरीबों के बारे में सोच सकें. उन्हें गरीबों के बच्चों की पढ़ाई की चिंता कहां थी. जिस प्रदेश का मुखिया 12 बजे सोकर उठता होगा, उससे अगर कोई सूर्योदय की बात करेगा तो वह उसे सपना मानेगा. क्योंकि उसे देश-दुनिया की कोई जानकारी नहीं होगी."
योगी जी ने पूर्व SP सरकार पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने DBT के जरिए 944.55 करोड़ रुपये 18 लाख से ज्यादा छात्रों को ट्रांसफर किए, जो पारदर्शिता की मिसाल है। उन्होंने अपनी सरकार की योजनाओं जैसे ऑपरेशन कायाकल्प, कस्तूरबा गांधी विद्यालय और अभ्युदय कोचिंग का जिक्र किया, मानो कह रहे हों – हम सुबह 4 बजे उठकर काम करते हैं, तुम्हें क्या पता!
लेकिन अखिलेश यादव कहां चुप रहने वाले! अगले ही दिन, 26 जनवरी 2026 को उन्होंने X पर पोस्ट कर पलटवार किया: "कुछ लोग नींद से तो उठ जाते हैं. लेकिन होश में नहीं आते और आंखें दिन भर बंद रहती हैं. ऐसे लोग जाग कर भी मदहोश रहते हैं."
वाह! यह तो सीधे योगी जी पर 'मदहोशी' का इल्जाम है – मतलब सुबह उठकर भी अगर होश न हो, तो क्या फायदा? अखिलेश ने और भी तीर चलाए। माघ मेला विवाद पर बोलते हुए कहा, "सुना है कि एक कोई सतुआ बाबा और बथुआ बाबा हैं. वैसे ये सीजन तो बथुआ का है." उन्होंने सरकार पर विज्ञापन से धोखा देने और शंकराचार्य जैसे धार्मिक नेताओं को परेशान करने का आरोप लगाया, साथ ही संविधान की दुहाई दी। पहले एक पोस्ट में उन्होंने योगी को झूठ फैलाने से रोकते हुए कहा कि BJP सरकार में शिक्षक और शिक्षा मित्र आंदोलित रहे, और PDA पाठशाला आंदोलन के दबाव में ही स्कूल बंद करने का प्लान रद्द हुआ।
यह बहस सिर्फ नींद की नहीं, बल्कि UP की सियासी नींद से जागने की है! याद कीजिए, योगी-अखिलेश की यह राइवलरी पुरानी है। 2022 चुनावों में भी ऐसे तंज कसे गए थे, जहां योगी ने अखिलेश को '12 बजे उठने वाला' कहा था।
अब 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, और शिक्षा, गरीबी, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे फिर गर्म हो रहे हैं। SP का दावा है कि BJP शिक्षा को एजेंडा में रखती ही नहीं, क्योंकि शिक्षित समाज सवाल पूछता है। वहीं BJP कहती है कि SP का शासन 'माफिया राज' था, जहां 'बबुआ' घर से बाहर नहीं निकलता था।
हंसी-मजाक में सियासत का यह तड़का UP की राजनीति को और स्पाइसी बना रहा है!तो क्या योगी जी अब 'मदहोशी' से उबरेंगे या अखिलेश की 'नींद' वाली बात पर और तंज कसेंगे? इंतजार कीजिए अगले एपिसोड का – UP की सियासत कभी सोती नहीं!
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