एक कमरा, 5 लाशें, 3 तमंचे और माथे पर गोली... सहारनपुर में अमीन ने पूरे परिवार को खत्म कर खुद भी उड़ा ली खोपड़ी!

पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी, आत्महत्या या...

Jan 22, 2026 - 09:38
Jan 22, 2026 - 09:39
 0
एक कमरा, 5 लाशें, 3 तमंचे और माथे पर गोली... सहारनपुर में अमीन ने पूरे परिवार को खत्म कर खुद भी उड़ा ली खोपड़ी!
फोटो: मौके पर पहुंची पुलिस टीम

Daily News Mirror| Saharanpur News 

सहारनपुर का सरसावा इलाका, जहां कौशिक विहार कॉलोनी की शांत गलियां आमतौर पर शाम ढलते ही सन्नाटे में डूब जाती हैं। यहां एक किराए के दोमंजिला मकान में रहता था राठी परिवार—अशोक राठी, एक 42 वर्षीय सरकारी अमीन (राजस्व अधिकारी), जो नकुड़ तहसील में तैनात था। उसकी पत्नी अंजिता, 40 साल की गृहिणी, जो घर संभालती थी; मां विद्यावती, 72 साल की बुजुर्ग महिला, जो परिवार की रीढ़ थी; और दो नाबालिग बेटे—कार्तिक, 15 साल का नौवीं कक्षा का छात्र, और देव, 14 साल का आठवीं कक्षा का बच्चा। बाहर से देखने पर यह परिवार सामान्य लगता था, लेकिन अंदरूनी दीवारों के पीछे एक अंधेरा छिपा था जो धीरे-धीरे सब कुछ निगल गया।

 अशोक राठी की जिंदगी कभी खुशहाल थी। वह एक मेहनती अधिकारी था, लेकिन चार साल पहले पिता की मौत ने उसे तोड़ दिया। फिर आया कोविड का दौर, जहां बीमारी ने उसके मन को और कमजोर कर दिया। डिप्रेशन की गिरफ्त में आकर वह छाया की तरह मौत देखने लगा था—हैल्यूसिनेशन, जहां उसे लगता कि मौत का साया परिवार पर मंडरा रहा है। पिछले साल उसने एक बार परिवार को स्लीपिंग पिल्स देकर मारने की कोशिश की थी, लेकिन बच गए। चंडीगढ़ के पीजीआई से इलाज करवा रहा था, लेकिन दवाएं उसकी अंदरूनी आग को बुझा नहीं पाईं।  

रिश्तेदार बताते हैं कि अशोक अक्सर पारिवारिक तनाव और आर्थिक दबाव की बात करता था, लेकिन कोई नहीं जानता था कि यह तनाव इतना घातक साबित होगा। 20 जनवरी 2026 की रात, जब शहर सो रहा था, अशोक के मन में तूफान उठा। करीब 3 बजे रात, उसने अपनी बहन मोहिनी को व्हाट्सएप पर एक वॉयस मैसेज भेजा: "बहुत बड़ी गलती हो गई है मुझसे।" साथ में एटीएम कार्ड के पासवर्ड शेयर किए, जैसे वह अलविदा कह रहा हो। पड़ोसियों ने रात में गोलियों की आवाज सुनी, लेकिन ठंडी रात और सन्नाटे ने उन्हें अनसुना कर दिया।

क्या हुआ उस रात बंद कमरे में? 

पुलिस की जांच से पता चला कि अशोक ने पहले परिवार के पानी में स्लीपिंग पिल्स मिलाईं, ताकि वे विरोध न कर सकें। फिर, तीन देशी तमंचों से करीब रेंज से उनके माथे पर गोली मारी—पहले मां विद्यावती, फिर पत्नी अंजिता, और आखिर में दोनों बेटों कार्तिक और देव को।  अंत में, खुद को गोली मार ली। कमरा अंदर से बंद था, कोई बाहरी घुसपैठ के निशान नहीं। कुल छह गोलियां चलीं, हर एक ने परिवार की जिंदगी का अंत कर दिया।

 सुबह होने पर पड़ोसियों को शक हुआ। मकान से कोई हलचल नहीं, दरवाजा बंद। उन्होंने पुलिस को बुलाया। दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे तो खून से सना दृश्य देखकर हर कोई सिहर उठा—पांच शव एक कमरे में, माथे पर गोली के घाव। सहारनपुर के एसएसपी आशीष तिवारी खुद घटनास्थल पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने मोबाइल, गोलियां और अन्य सबूत इकट्ठे किए। पोस्टमॉर्टम ने पुष्टि की कि मौतें गोली लगने से हुईं, और सभी शॉट्स क्लोज रेंज से थे। पुलिस का कहना है कि यह हत्या-आत्महत्या का साफ मामला है, लेकिन जांच सभी एंगल से जारी है।

 यह घटना सिर्फ एक परिवार की मौत नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी का दर्दनाक सबूत है। पड़ोसी स्तब्ध हैं—वे कहते हैं कि राठी परिवार शांत था, कोई दुश्मनी नहीं। लेकिन अशोक का वह आखिरी मैसेज अब भी गूंजता है: "बहुत बड़ी गलती हो गई।" क्या यह गलती डिप्रेशन थी, या कुछ और? पुलिस जांच पूरी होने तक रहस्य बरकरार है, लेकिन सहारनपुर की यह रात लंबे समय तक लोगों के जेहन में रोंगटे खड़े करती रहेगी।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow