प्रतापगढ़ में ड्रग माफिया राजेश मिश्रा का काला साम्राज्य ध्वस्त, यूपी में आज तक की सबसे बड़ी कैश रिकवरी का बना रिकॉर्ड
Daily News Mirror| Pratapgarh News
प्रतापगढ़, 9 नवंबर 2025: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पुलिस ने एक सनसनीखेज छापेमारी को अंजाम दिया है, जिसमें जेल में बंद कुख्यात गांजा तस्कर राजेश मिश्रा के परिवार ने संचालित नशे के साम्राज्य का पर्दाफाश हो गया। मानिकपुर थाना क्षेत्र के मुंदीपुर गांव स्थित राजेश के पैतृक घर से 2 करोड़ 1 लाख 55 हजार 345 रुपये का कैश, 6.075 किलो गांजा और 577 ग्राम स्मैक बरामद हुआ। कुल बरामदगी की अनुमानित कीमत 3 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास की सबसे बड़ी ड्रग रिकवरी में से एक मानी जा रही है।
छापेमारी शनिवार सुबह करीब 8-9 बजे शुरू हुई और रविवार सुबह तक चली, जो कुल 24 घंटे की अथक मशक्कत थी। एसपी दीपक भूकर के नेतृत्व में कुंडा सीओ अमरनाथ गुप्ता की अगुवाई वाली चार पुलिस टीमों (कुल 22 पुलिसकर्मी) ने घर के हर कोने की तलाशी ली। कैश झोलों, बोरियों, पॉलीथिन पन्नियों, अलमारियों, लोहे के संदूकों, प्लास्टिक डिब्बों और यहां तक कि बेड के अंदर छिपा मिला। ज्यादातर नोट 20, 50 और 100 रुपये के थे, जिनकी गिनती हाथ से करने पर पुलिसकर्मी थक गए। आखिरकार चार नोट काउंटिंग मशीनें मंगवानी पड़ीं, और फिर भी प्रक्रिया में 22 घंटे लग गए।
गांजा और स्मैक अंधेरे कमरों और तहखाने में काले पन्नियों में छिपाए गए थे। इनकी बाजार कीमत क्रमशः 3 लाख 3 हजार 750 रुपये और 1 करोड़ 15 लाख 40 हजार रुपये आंकी गई है। पुलिस के अनुसार, यह नकदी और नशीले पदार्थ बैंक खातों के फ्रीज होने के बाद परिवार द्वारा घर में जमा किए जा रहे थे।
जेल से फोन पर निर्देश: परिवार ने संभाला था कमान
मुख्य आरोपी राजेश मिश्रा वर्तमान में जेल में बंद है, जिस पर 14 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें गैंगस्टर एक्ट और एनडीपीएस एक्ट शामिल हैं। 15 दिन पहले जिला न्यायालय में आत्मसमर्पण करने के बाद वह जेल पहुंचा था। बावजूद इसके, वह जेल से फोन या मुलाकात के जरिए पत्नी रीना मिश्रा को निर्देश देकर नशे का कारोबार चला रहा था। रीना (40 वर्ष) पर भी 6 केस दर्ज हैं और वह हाल ही में जमानत पर रिहा हुई थीं। जांच में पता चला कि परिवार ने गांव के राजेंद्र मौर्य से फर्जी दस्तावेज (कॉलोनी के नाम पर अभिलेख) तैयार कराकर राजेश की जमानत कराई थी, जिसके चलते अतिरिक्त मुकदमे दर्ज हुए हैं।
छापे के दौरान रीना ने दरवाजा बंद कर पुलिस को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्हें तुरंत काबू कर लिया गया। गिरफ्तार सदस्यों में रीना मिश्रा के अलावा बेटा विनायक मिश्रा (19 वर्ष), बेटी कोमल मिश्रा (20 वर्ष), भतीजा अजीत मिश्रा (32 वर्ष) और यश मिश्रा (19 वर्ष, अजीत का बेटा) शामिल हैं। विनायक पहले भी एनडीपीएस के मामलों में गिरफ्तार हो चुका है। सभी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं (जैसे 319(2), 318(4), 338, 336(3) आदि) में मुकदमे दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया।
संपत्ति कुर्की और नेटवर्क पर शिकंजा
पुलिस ने गिरोह की अवैध चल-अचल संपत्ति (अनुमानित मूल्य 3 करोड़ 6 लाख 26 हजार 895 रुपये) की कुर्की की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर दी है। राजेश के पास मानिकपुर में तीन मकान हैं, जिनमें एक दो मंजिला (जहां छापा मारा गया) और दो तीन मंजिला शामिल हैं। एसपी दीपक भूकर ने कहा, "यह कार्रवाई नशे के सौदागरों पर निर्णायक प्रहार है। जेल से चलने वाले नेटवर्क को तोड़ने के लिए अन्य जिलों और राज्यों में जांच तेज की जा रही है।" गिरोह का नेटवर्क प्रतापगढ़ के अलावा आसपास के जिलों तक फैला था, और पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश में जुटी हुई है।
यह घटना नशे के कारोबार के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार के अभियान का हिस्सा है, जो संगठित अपराध को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प ले चुकी है। बरामद कैश कोषागार में जमा कराया जाएगा, जबकि नशीले पदार्थ नष्ट करने की प्रक्रिया चल रही है। स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही चिंता जताई कि ऐसे नेटवर्क गांवों में युवाओं को बर्बाद कर रहे हैं।
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