मिर्जापुर में अंधविश्वास का काला साया: मां ने दो मासूम बेटों की क्रूर हत्या कर खुद फंदे पर झूली 

Oct 26, 2025 - 04:59
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मिर्जापुर में अंधविश्वास का काला साया: मां ने दो मासूम बेटों की क्रूर हत्या कर खुद फंदे पर झूली 
File Photo

Daily News Mirror| Mirzapur News 

मिर्जापुर, 26 अक्टूबर 2025: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के कछवां थाना क्षेत्र अंतर्गत सेमरी गांव (मदरसा मोहल्ला) में शनिवार शाम एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को सदमे की चपेट में ले लिया। 35 वर्षीय संगीता बिंद (हरिश्चंद्र बिंद की पत्नी) ने भूत-प्रेत के अंधविश्वास के जाल में फंसकर अपने दो नन्हे बेटों—चार वर्षीय शिवांश और दो वर्षीय शुभंकर—के मुंह में कपड़ा ठूंसकर गला घोंट दिया। बच्चों के हाथ-पैर बांधकर उन्हें पलंग पर लेटा दिया, उसके बाद खुद कमरे के पंखे से दुपट्टे का फंदा बनाकर लटक गई। यह त्रासदी झाड़-फूंक और काले जादू की मान्यताओं से प्रेरित बताई जा रही है, जिसमें संगीता खुद भी सक्रिय थी।

घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में सनसनी फैल गई। स्वजन और मायके वाले तुरंत पहुंचे, जिन्होंने पुलिस को सूचना दी। कछवां थाने की टीम, सीओ सदर अमर बहादुर सिंह और थानाध्यक्ष अमरजीत चौहान के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया, साक्ष्य एकत्र किए और तीनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने किसी बाहरी साजिश की आशंका से इंकार किया है, लेकिन सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। मिर्जापुर पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया अपडेट के अनुसार, "घटना की वैधानिक कार्रवाई जारी है और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जांच तेज कर दी गई है।"

संगीता के पति हरिश्चंद्र बिंद, जो मजदूरी का काम करते हैं, ने घटना का दिल दहला देने वाला ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया, "शनिवार सुबह करीब 10 बजे मैं बाजार के लिए निकल गया था। शाम पांच बजे घर लौटा तो कच्चे मकान का दरवाजा अंदर से बंद था। कई बार पीटने पर भी कोई जवाब नहीं आया। सोचा सभी सो रहे होंगे। टीनशेड के झरोखे से झांका तो बच्चे जमीन पर लेटे हुए दिखे और पंखा चल रहा था। लगा सब सो रहे हैं, तो मैं गांव घूमने चला गया। एक घंटे बाद लौटकर फिर दरवाजा पीटा, लेकिन खुला नहीं। आखिरकार दरवाजा तोड़कर अंदर घुसा तो संगीता फंदे से झूल रही थी और दोनों बच्चे मृत पड़े थे।" हरिश्चंद्र ने आगे खुलासा किया कि संगीता दो महीने बाद शुक्रवार को चंदौली के मायके से बच्चों संग लौटी थी। वह पिछले कुछ दिनों से असामान्य व्यवहार कर रही थी—रातों को जागना, भूत-प्रेत की बातें करना और परिवार पर 'बुरी शक्ति' का साया होने का अंदेशा जताना।

परिवार के अन्य सदस्यों और ग्रामीणों के अनुसार, संगीता अंधविश्वासी प्रवृत्ति की थी और गांव में झाड़-फूंक का काम भी करती थी। उसे लगता था कि उसके परिवार पर कोई 'प्रेतात्मा' का प्रभाव है, जिसके चलते वह मानसिक रूप से टूट चुकी थी। शादी को आठ वर्ष हो चुके थे और परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। एक पुरानी तस्वीर में संगीता अपने दोनों बच्चों के साथ मुस्कुराती नजर आ रही है, जो इस घटना की विडंबना को और गहरा बनाती है। बच्चे इतने छोटे थे कि बोलने-पढ़ने लायक भी नहीं थे, जिससे पूरा मामला और भी मार्मिक हो जाता है।

यह घटना उत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों में व्याप्त अंधविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी की कड़वी सच्चाई को सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा की कमी, सामाजिक जागरूकता के अभाव और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच न होने से ऐसी त्रासदियां बढ़ रही हैं। मिर्जापुर जिला प्रशासन ने पहले भी झाड़-फूंक के खिलाफ अभियान चलाए हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही। गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और ग्रामीणों ने प्रशासन से कड़े कदम उठाने तथा जागरूकता कार्यक्रमों की मांग की है। पुलिस ने पुष्टि की है कि जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

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