पत्नी की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सका पति, 12 घंटे बाद खुद भी तोड़ा दम; एक साथ जली चिताएं, पूरा गरौठा रो पड़ा
Daily News Mirror| Jhansi News
झांसी, 5 अक्टूबर 2025: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के गरौठा कस्बे में एक ऐसी घटना घटी, जिसने सच्चे प्यार और वैवाहिक बंधन की मिसाल पेश कर दी। 76 वर्षीय रामरतन गुप्ता और उनकी 70 वर्षीय पत्नी रामदेवी गुप्ता का निधन महज 12 घंटे के अंतराल में हो गया। रामदेवी का शनिवार सुबह निधन होने के बाद पति रामरतन सदमे से टूट गए और रात में उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। रविवार को दोनों की अर्थियां एक साथ उठाई गईं और एक ही चिता पर उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसकी तस्वीरें देखकर पूरा इलाका भावुक हो गया।
परिवारजन और स्थानीय लोगों के अनुसार, रामदेवी पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। शनिवार सुबह उनका निधन हो गया। पत्नी की लाश देखते ही रामरतन गुप्ता सदमे में चले गए। वे कुछ देर तक पत्नी के पास बैठे रहे, लेकिन सदमा इतना गहरा था कि रात करीब 8 बजे उन्होंने भी अंतिम सांस ली। परिवार के सदस्यों ने बताया कि रामरतन को हृदयाघात हुआ, जो शोक के कारण ही था। डॉक्टरों ने भी यही पुष्टि की है।
रामरतन और रामदेवी की शादी को 50 से अधिक वर्ष हो चुके थे। दंपति गरौठा में एक प्रतिष्ठित परिवार के सदस्य थे। रामरतन गुप्ता एक जाने-माने समाजसेवी थे, जिन्होंने 60 वर्षों तक धर्मार्थ कार्यों में योगदान दिया। वे गरीबों की मदद, मंदिरों के निर्माण और सामाजिक समारोहों में सक्रिय रहते थे। रामदेवी भी पति के हर कदम पर साथ रहीं और घर-परिवार के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में उनकी प्रमुख सहयोगी बनीं। स्थानीय निवासी उन्हें 'आदर्श दंपति' के रूप में याद करते हैं। उनके दो बेटे और कई पोते-पोतियां हैं, जो अब इस दुख को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
रविवार सुबह गरौठा कस्बे में शोक सभा का माहौल था। दोनों की अर्थियां एक साथ सजीं तो सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोग आंसू पोछते हुए कह रहे थे, "सच्चा प्यार वही है जो जीवन-मरण तक साथ निभाए।" अंतिम संस्कार गरौठा के घाट पर किया गया, जहां एक ही चिता पर दोनों का दाह संस्कार हुआ। इस दृश्य ने सभी को रुला दिया। एक बुजुर्ग निवासी ने बताया, "रामरतन जी ने कहा था कि रामदेवी के बिना उनका जीवन अधूरा है। आज वो वचन निभा गए।"
यह घटना झांसी और आसपास के जिलों में चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया पर भी लोग इसकी तारीफ कर रहे हैं, इसे 'अमर प्रेम की मिसाल' बता रहे हैं। परिवार ने बताया कि दंपति हमेशा एक-दूसरे को प्राथमिकता देते थे। रामरतन अक्सर कहते थे, "जीवन का साथी वही है जो मृत्यु के बाद भी अलग न करे।" इस मार्मिक घटना ने एक बार फिर याद दिला दिया कि सच्चा बंधन समय की सीमा से परे होता है। गरौठा के लोग दंपति की स्मृति में प्रार्थना सभा का आयोजन कर रहे हैं।
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