डिलीवरी बॉय से डिप्टी कलेक्टर: सूरज यादव की मेहनत और पत्नी के विश्वास से रचा इतिहास

Aug 20, 2025 - 15:15
 0
डिलीवरी बॉय से डिप्टी कलेक्टर: सूरज यादव की मेहनत और पत्नी के विश्वास से रचा इतिहास
फोटो: सूरज यादव

Daily News Mirror| Ranchi, Jharkhand

रांची/गिरिडीह: “सपने वो नहीं जो सोते वक्त देखे जाते हैं, सपने वो हैं जो आपको सोने न दें।” झारखंड के गिरिडीह जिले के छोटे से गांव कपिलो से निकले सूरज यादव ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। एक डिलीवरी बॉय, जिसके पास न बाइक थी, न आराम, और न ही आर्थिक सुविधाएं, उसने अपनी मेहनत, पत्नी के अटूट समर्थन, और परिवार के विश्वास के दम पर झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में 110वीं रैंक हासिल की और अब डिप्टी कलेक्टर बनने जा रहे हैं। उनकी यह कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल हालात में भी अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहता है।

गरीबी और संघर्ष से भरा बचपन

सूरज यादव का जन्म गिरिडीह के कपिलो गांव में एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता द्वारिका यादव राजमिस्त्री का काम करते थे, और घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी चुनौती था। सूरज ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही पूरी की और फिर ग्रेजुएशन के लिए रांची का रुख किया। लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ परिवार का खर्च चलाना जरूरी था। इसके लिए सूरज ने पहले कॉल सेंटर में नौकरी की और फिर स्विगी और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर डिलीवरी बॉय का काम शुरू किया। दिन में 4-5 घंटे ट्रैफिक में खाना डिलीवर करते, थकान से चूर होकर भी सूरज रात में अपनी किताबों के साथ जंग लड़ते।

पत्नी पूनम: सूरज की सबसे बड़ी ताकत

सूरज की जिंदगी में एक नया मोड़ तब आया, जब उनकी शादी पूनम से हुई। घर की आर्थिक तंगी के बीच सूरज ने पूनम से पूछा, “मैं कमाने जाऊं या जेपीएससी की तैयारी करूं?” पूनम ने बिना हिचक जवाब दिया, “आप पढ़ने जाइए, खर्च की चिंता मत करिए।”

फोटो: पूनम यादव (सूरज की पत्नी)

पूनम के मायके वालों ने 2020 तक आर्थिक सहायता दी, जिससे सूरज अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सके। 2020 में जब सूरज और पूनम के घर बेटे का जन्म हुआ, तो जिम्मेदारियां बढ़ गईं। उसी दौरान पूनम की बहन की शादी के कारण मायके से मिलने वाली आर्थिक मदद भी बंद हो गई। फिर भी पूनम ने सूरज का हौसला बढ़ाया और कहा, “जेपीएससी की तैयारी करो, मैं सब संभाल लूंगी।” 

पहला प्रयास और असफलता

सूरज ने 2022 में जेपीएससी की परीक्षा दी। प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद मुख्य परीक्षा में वे केवल सात अंकों से चूक गए। यह असफलता किसी को भी तोड़ सकती थी, लेकिन सूरज ने हार नहीं मानी। पूनम और उनकी बहन ने हर कदम पर उनका साथ दिया। सूरज ने फिर से डिलीवरी बॉय की नौकरी शुरू की, ताकि परिवार का खर्च चल सके। दिन में स्विगी और रैपिडो के लिए खाना डिलीवर करते, और रात में किताबों के साथ घंटों पढ़ाई करते। इस दौरान उनकी मेहनत और अनुशासन ने उन्हें एक नई ताकत दी।

इंटरव्यू में चौंकाया, 110वीं रैंक हासिल की

2023 में सूरज ने दोबारा जेपीएससी परीक्षा दी। इस बार उनकी मेहनत रंग लाई। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पास करने के बाद जब वे इंटरव्यू के लिए पहुंचे, तो बोर्ड के सदस्यों को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि सूरज एक डिलीवरी बॉय हैं। सूरज ने डिलीवरी प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी सवालों के इतने सटीक जवाब दिए कि बोर्ड के सदस्य भी प्रभावित हो गए। सूरज ने बताया, “यह सिर्फ नौकरी नहीं थी, यह एक अनुभव था, जिसने मुझे प्रशासनिक सेवा के लिए तैयार किया।” उनकी इस मेहनत और आत्मविश्वास का नतीजा रहा कि जेपीएससी 2023 के परिणाम में उन्होंने 110वीं रैंक हासिल की। सूरज का चयन अनारक्षित वर्ग के तहत डिप्टी कलेक्टर के पद के लिए हुआ। 

परिवार और समाज का योगदान

सूरज अपनी सफलता का श्रेय केवल अपनी मेहनत को नहीं देते। वे कहते हैं, “इस मुकाम तक पहुंचने में मेरी पत्नी पूनम, मेरी बहन, और मेरे दोस्तों का बहुत बड़ा योगदान है।” सूरज की बहन ने घर की जिम्मेदारियां संभालीं, ताकि सूरज पढ़ाई पर ध्यान दे सकें। उनकी पत्नी पूनम ने हर मुश्किल में उनका हौसला बढ़ाया। सूरज ने इंटरव्यू से पहले अपनी पंचायत के बारे में जानकारी लेने के लिए मुखिया मुकेश यादव से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें प्रोत्साहित किया और कहा, “तुम्हें सफलता जरूर मिलेगी।”

युवाओं के लिए प्रेरणा

सूरज यादव की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो आर्थिक तंगी या मुश्किल हालात के कारण अपने सपनों को छोड़ देते हैं। सूरज कहते हैं, “गरीबी को मैंने बहुत करीब से देखा है। लेकिन अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुश्किल रास्ता नहीं रोक सकती।” उनकी कहानी सिखाती है कि मेहनत, अनुशासन, और परिवार का साथ मिल जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

सूरज का कहना है, “जेपीएससी या यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मेरा दरवाजा हमेशा खुला है। अगर किसी को किसी तरह की मदद चाहिए, तो मैं हमेशा तैयार हूं।” उनकी यह उदारता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव उन्हें न केवल एक अच्छा प्रशासक, बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाता है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow