मिर्जापुर: खनन पट्टों में भ्रष्टाचार पर बड़ा खुलासा, यूपी सरकार को करोड़ों का नुकसान, पूर्व डीएम पर लगे गंभीर आरोप

Aug 12, 2025 - 16:39
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मिर्जापुर: खनन पट्टों में भ्रष्टाचार पर बड़ा खुलासा, यूपी सरकार को करोड़ों का नुकसान, पूर्व डीएम पर लगे गंभीर आरोप
सांकेतिक फोटो

Daily News Mirror| Mirzapur 

मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश: मिर्जापुर में एक बार फिर अवैध खनन और भ्रष्टाचार का मामला सुर्खियों में है। पूर्व जिलाधिकारी (डीएम) प्रियंका निरंजन और खनन अधिकारी जितेंद्र पटेल पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिसमें बिना विज्ञापन के आधी कीमत पर खनन पट्टे बांटने और शैलेंद्र पटेल के नेतृत्व में एक सिंडिकेट को फायदा पहुंचाने की बात सामने आई है। इस घोटाले से उत्तर प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। भारत समाचार की खबर के बाद कमिश्नर ने खनन पट्टों को रद्द कर दिया, लेकिन इस मामले ने खनन माफिया और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घोटाले का खुलासा

जानकारी के अनुसार, मिर्जापुर में खनन की रॉयल्टी दर 200-220 रुपये प्रति घनमीटर निर्धारित थी, जिसे घटाकर 110 रुपये प्रति घनमीटर कर दिया गया। इसके बाद केवल 2-5 रुपये की मामूली वृद्धि के साथ खनन पट्टे आवंटित किए गए, जिससे खनन माफियाओं को भारी मुनाफा हुआ। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी, क्योंकि टेंडरों का उचित विज्ञापन नहीं किया गया, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। 

इस घोटाले में शैलेंद्र पटेल के सिंडिकेट का नाम प्रमुखता से सामने आया है। आरोप है कि शैलेंद्र पटेल के रिश्तेदार जितेंद्र पटेल, जो मिर्जापुर में खनन अधिकारी के रूप में तैनात हैं, ने इस गड़बड़ी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, शैलेंद्र पटेल के करीब दो दर्जन रिश्तेदार खनन विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं, जिससे इस सिंडिकेट की पहुंच और प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सरकार के राजस्व को भारी नुकसान

इस घोटाले के कारण उत्तर प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। पहले भी मिर्जापुर में 16 लाख घनमीटर MM11 (खनन सामग्री) का दुरुपयोग होने की बात सामने आई थी, और अब इस नए घोटाले में एक सिंडिकेट को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है। रॉयल्टी दर में भारी कमी और बिना विज्ञापन के पट्टों के आवंटन से सरकारी खजाने को नुकसान हुआ, जबकि खनन माफियाओं ने मोटा मुनाफा कमाया। 

प्रशासनिक कार्रवाई और जांच की मांग

भारत समाचार की खबर के बाद मिर्जापुर के कमिश्नर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए विवादास्पद खनन पट्टों को रद्द कर दिया। हालांकि, स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता इस मामले में गहन जांच की मांग कर रहे हैं। विशेष रूप से शैलेंद्र पटेल और जितेंद्र पटेल की संपत्ति की जांच की मांग जोर पकड़ रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले से कितना अनुचित लाभ कमाया गया।

इसके अलावा, मिर्जापुर में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने कई बार कार्रवाई की है। हाल ही में, जिला प्रशासन ने एक दिन में 82 लोगों के खिलाफ अवैध खनन के मामले में मुकदमा दर्ज किया था, जिसमें दो बीजेपी नेता भी शामिल थे। इसके बावजूद, खनन माफिया का दबदबा कम नहीं हुआ है, और विंध्य पर्वत जैसे प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बदस्तूर जारी है। 

पर्यावरण और स्थानीय लोगों पर प्रभाव

मिर्जापुर के विंध्य पर्वत क्षेत्र में अवैध खनन के कारण पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीणों ने लगातार ब्लास्टिंग के कारण होने वाली समस्याओं की शिकायत की है। एक शिकायत पत्र में बताया गया कि अवैध खनन और भारी बारूद के इस्तेमाल से न केवल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है, बल्कि स्थानीय पशु-पक्षियों और वन्यजीवों का जीवन भी खतरे में है। ब्लास्टिंग के कारण मकानों में दरारें पड़ रही हैं, और एक मामले में कुएं के धंसने से एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। 

प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार

इस पूरे मामले में पूर्व डीएम प्रियंका निरंजन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान मिर्जापुर में कई गड़बड़ियां सामने आईं, जिनमें सड़क निर्माण घोटाला भी शामिल है। हालांकि, प्रियंका निरंजन ने अवैध खनन के खिलाफ कुछ कार्रवाइयां भी की थीं, जैसे कि जनवरी 2025 में कछवा थाना क्षेत्र में छापेमारी। फिर भी, उनके कार्यकाल में खनन पट्टों के आवंटन में अनियमितताओं ने प्रशासनिक विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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