गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार, पहले निर्माण पैकेज के लिए आठ बड़ी कंपनियों ने लगाई बोली

May 21, 2025 - 13:09
May 21, 2025 - 13:14
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गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार, पहले निर्माण पैकेज के लिए आठ बड़ी कंपनियों ने लगाई बोली

डेली न्यूज मिरर

गुरुग्राम (21 मई 2025): गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) के 28.5 किलोमीटर लंबे नए मेट्रो कॉरिडोर के पहले सिविल निर्माण पैकेज CC-01 के लिए बीते सप्ताह आठ प्रमुख सिविल इंजीनियरिंग कंपनियों ने बोली लगाई है। यह कॉरिडोर एचयूडीए मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक जाएगा और गुरुग्राम व पुराने गुरुग्राम को जोड़ने वाली एक रिंग लाइन के रूप में विकसित किया जाएगा। इस रूट पर कुल 27 स्टेशन प्रस्तावित हैं।

CC-01 पैकेज के तहत 14 एलिवेटेड मेट्रो स्टेशनों का निर्माण, मुख्य लाइन के लिए 13.197 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट, बसई से द्वारका एक्सप्रेसवे तक 1.85 किलोमीटर लंबा स्पर और सेक्टर 33 डिपो तक जाने वाले रैम्प का निर्माण शामिल है। हालांकि लागत का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस पैकेज की अनुमानित लागत लगभग 1286 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

इस मेट्रो लाइन के डीटेल्ड डिजाइन कंसल्टेंट (DDC) का कार्य अक्टूबर 2024 में सिस्ट्रा एमवीए कंसल्टिंग (इंडिया) को सौंपा गया था। इसके बाद मार्च 2025 में GMRL ने CC-01 पैकेज के लिए टेंडर आमंत्रित किए, जिसकी कुल समयसीमा 721 दिन (लगभग दो वर्ष) रखी गई है। इस टेंडर के लिए जिन आठ कंपनियों ने हिस्सा लिया है, उनमें अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड (DBL), डीआरए इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड (DRAIPL), जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड (GRIL), जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड (JKIL), कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड (KPIL), एलएंडटी (L&T) और रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) शामिल हैं।

इस पैकेज का दायरा मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर 9 तक (चेनज (-)594 मीटर से 12603 मीटर) एलिवेटेड स्टेशन और वायाडक्ट निर्माण तक सीमित है। इसके अलावा बसई गांव से द्वारका एक्सप्रेसवे तक स्पर और सेक्टर 33 डिपो तक जाने वाला रैम्प भी शामिल है, हालांकि पीईबी और आर्किटेक्चरल फिनिशिंग कार्य इसमें शामिल नहीं हैं।

फिलहाल सभी बोलियों को तकनीकी मूल्यांकन के लिए भेजा गया है, जिसकी प्रक्रिया पूरी होने में कुछ महीने लग सकते हैं। इसके बाद ही तकनीकी रूप से योग्य ठेकेदारों की वित्तीय बोलियां खोली जाएंगी और सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी को कार्य सौंपा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस मेट्रो परियोजना को भारत सरकार की कैबिनेट ने जून 2023 में मंजूरी दी थी, जिसके बाद से इस चरण तक पहुंचने में लंबा इंतजार करना पड़ा है। हालांकि, CC-01 पैकेज के लिए मिली ठोस भागीदारी से परियोजना को रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

वहीं दिसंबर 2024 में जनरल कंसल्टेंट कॉन्ट्रैक्ट के लिए भी आठ बोलियां प्राप्त हुई थीं, जिनका तकनीकी मूल्यांकन अब तक जारी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि GMRL तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया को कितनी तेजी से पूरा कर वित्तीय बोलियां खोलने की ओर बढ़ता है।।

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