मिर्जापुर जिला जेल में वार्डर आनंद शुक्ला की मौत, पत्नी ने अधीक्षक पर लगाए गंभीर आरोप

Feb 24, 2026 - 07:06
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मिर्जापुर जिला जेल में वार्डर आनंद शुक्ला की मौत, पत्नी ने अधीक्षक पर लगाए गंभीर आरोप
फोटो: रोते बिलखते परिजन

Daily News Mirror| Mirzapur News 

मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश), 23 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिला कारागार में तैनात 45 वर्षीय वार्डर (बंदी रक्षक) आनंद शुक्ला की रविवार रात बीमारी के चलते मंडलीय अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने जेल अधीक्षक पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि जेल प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पूरे मामले में जेल प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है और अस्पताल परिसर में मृतक की पत्नी व बेटी रोते-बिलखते नजर आईं।

आनंद शुक्ला मूल रूप से जौनपुर जिले के खेतासराय थाना क्षेत्र के हरन गांव के रहने वाले थे। वे पिछले छह महीने से मिर्जापुर जिला जेल में वार्डर के पद पर तैनात थे। परिवार के अनुसार, वे कई हफ्तों से पैरों में झनझनाहट (tingling/numbness) की समस्या से पीड़ित थे और लगातार इलाज के लिए छुट्टी की मांग कर रहे थे। कुछ रिपोर्टों में उनकी बीमारी को पेट संबंधी भी बताया गया है।

रविवार शाम करीब 7 बजे ड्यूटी के दौरान या उसके तुरंत बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। जेल कर्मचारियों ने बताया कि जेल अधीक्षक से संपर्क करने पर उन्होंने जेल के चिकित्सक से इलाज कराने को कहा। जेल डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें एम्बुलेंस से मंडलीय अस्पताल ले जाया गया। वहां इमरजेंसी में रात साढ़े आठ बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उन्हें ड्यूटी के बाद अपने प्राइवेट कमरे (जो अंदर से बंद था) में अचेत अवस्था में पाया गया।

परिवार का आरोप: मृतक की पत्नी प्रीति शुक्ला और बेटी ने अस्पताल परिसर में रोते हुए जेल अधीक्षक पर इलाज के लिए छुट्टी न देने का आरोप लगाया। प्रीति शुक्ला का कहना है, “पति कई दिनों से बीमार थे। उन्होंने छुट्टी के लिए आवेदन किया, फोन पर बताया कि छुट्टी नहीं मिल रही। मेडिकल लीव के लिए कहा, लेकिन नहीं दी गई। बेहतर इलाज न मिलने के कारण यह दुखद घटना हुई।” परिवार ने जेल प्रशासन की लापरवाही का भी आरोप लगाया।

जेल अधीक्षक का जवाब: जेल अधीक्षक राजेंद्र प्रताप चौधरी (आरपी चौधरी) ने सभी आरोपों को निराधार और झूठा बताते हुए कहा, “बीमार होने पर वार्डर का उचित उपचार कराया गया। जेल डॉक्टर के बाद प्राइवेट डॉक्टर को भी दिखाया गया। कुछ दिन पहले उनके साले की शादी थी, जिसमें उन्हें एक सप्ताह की छुट्टी दी गई थी। समय-समय पर छुट्टियां दी जाती रही हैं। पत्नी झूठे आरोप लगा रही हैं।”

घटना की सूचना मिलते ही जेल कर्मचारी और सिपाही मंडलीय अस्पताल पहुंच गए, जहां कुछ कर्मचारियों ने भी अधीक्षक पर नाराजगी जताई। परिवार में मातम का माहौल है—पत्नी ने पति खोया तो बेटी ने पिता। मृतक के एक बेटे का भी जिक्र कुछ रिपोर्टों में है।

अभी तक मौत का कारण आधिकारिक रूप से बीमारी ही बताया जा रहा है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट या आगे की जांच की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जेल प्रशासन में हड़कंप के बीच यह मामला सरकारी नौकरियों में चिकित्सा छुट्टी और स्टाफ वेलफेयर से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर उठा रहा है।

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