सतुआ बाबा की रोटी के चक्कर में मत पड़ो: केशव मौर्य की प्रयागराज DM को तल्ख नसीहत, वीडियो वायरल
Daily News Mirror| Prayagraj News
प्रयागराज, 30 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने माघ मेले की तैयारियों का औचक निरीक्षण करते हुए प्रयागराज के जिलाधिकारी (डीएम) मनीष कुमार वर्मा को कड़ी फटकार लगाई। निरीक्षण के दौरान अधूरी तैयारियों पर नाराजगी जताते हुए डिप्टी सीएम ने डीएम से कहा, "सतुआ बाबा के चक्कर में ना पड़ो।" यह टिप्पणी उस वायरल वीडियो के संदर्भ में आई, जिसमें डीएम सतुआ बाबा के शिविर में रोटी बनाते नजर आए थे। इस घटना ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
घटना का विवरण
मंगलवार को डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य अचानक प्रयागराज के संगम नोज पहुंचे और माघ मेले की तैयारियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने गंगा जल से आचमन किया और मां गंगा की पूजा-अर्चना की। हालांकि, मेले की तैयारियां अधर में लटकी देखकर वे भड़क उठे। डीएम मनीष कुमार वर्मा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सतुआ बाबा के शिविर में रोटी बनाने से फुर्सत मिले तो अन्य साधु-संतों की ओर ध्यान दें, जिन्हें अभी तक जमीन और सुविधाएं नहीं मिली हैं। आसपास मौजूद अधिकारियों और लोगों में इस टिप्पणी पर हंसी के ठहाके गूंज उठे, लेकिन डिप्टी सीएम का गुस्सा साफ नजर आ रहा था। अधिकारियों में हड़कंप मच गया, और निरीक्षण के दौरान कई कमियां उजागर हुईं।
वीडियो फुटेज से पता चलता है कि डिप्टी सीएम अपनी कार से बाहर झुककर डीएम से सीधे बात कर रहे थे, जबकि आसपास भीड़ जमा थी। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां यूजर्स इस पर तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं।
वायरल वीडियो का बैकग्राउंड
यह पूरी घटना उस वीडियो से जुड़ी है जो बीते बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में डीएम मनीष कुमार वर्मा खाक चौक स्थित सतुआ बाबा के शिविर में चूल्हे पर रोटी बनाते दिखाई दे रहे थे। सतुआ बाबा, जिनका असली नाम संतोष दास है, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहद करीबी माने जाते हैं। इस वीडियो की चर्चा लखनऊ तक पहुंची, जिसके बाद डिप्टी सीएम को कार्रवाई की जरूरत महसूस हुई।
सतुआ बाबा कौन हैं?
संतोष दास जी महाराज, उर्फ सतुआ बाबा, काशी (वाराणसी) से जुड़े एक प्रमुख संत हैं। वे सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में सक्रिय रहते हैं और महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फरवरी 2025 में महाकुंभ के दौरान उनका जगद्गुरु के रूप में अभिषेक हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद हिस्सा लिया। सतुआ बाबा को योगी जी का करीबी सहयोगी माना जाता है, और वे अक्सर धार्मिक अनुष्ठानों में साथ नजर आते हैं। हाल ही में भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक के साथ ट्रिवेणी संगम पर स्नान के दौरान भी सतुआ बाबा मौजूद थे।
माघ मेले की तैयारियां और राजनीतिक कोण
माघ मेला इस साल मिनी कुंभ की तर्ज पर आयोजित हो रहा है, जहां कल्पवासी एक महीने तक साधना कर सकेंगे। डिप्टी सीएम ने बताया कि राज्य सरकार ने मेले का बजट अखिलेश यादव के शासनकाल के 30 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया है, जो तीन गुना से अधिक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि यदि पूर्ण कल्पवास नहीं कर सकते तो अल्पवास जरूर करें। मेले में महाकुंभ की तरह चाक-चौबंद व्यवस्था की जा रही है, ताकि साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।
इस घटना में राजनीतिक कोण भी जुड़ गया है। डिप्टी सीएम ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल में मिली हार के बाद उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। उन्होंने 2013 के कुंभ मेले का जिक्र करते हुए सपा सरकार की आलोचना की और कहा कि अखिलेश को ऐसे आयोजनों पर बोलने का कोई हक नहीं है।
लोगों की प्रतिक्रियाएं और आगे की संभावनाएं
सोशल मीडिया पर इस घटना की चर्चा जोरों पर है। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर कई यूजर्स ने वीडियो शेयर किए, जहां डिप्टी सीएम की टिप्पणी को राजनीतिक रंजिश से जोड़ा जा रहा है। कुछ यूजर्स इसे प्रशासनिक अनुशासन का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे योगी आदित्यनाथ के करीबियों पर निशाना मान रहे हैं।
डीएम मनीष कुमार वर्मा की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, इस फटकार के बाद तैयारियों को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। माघ मेला 2026 की शुरुआत से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी करने पर जोर है। यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए विवाद को जन्म दे सकती है, खासकर जब महाकुंभ 2025 की यादें अभी ताजा हैं।
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