वाराणसी-प्रयागराज नेशनल हाइवे के लाला नगर टोल प्लाजा पर 62.87 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर, जांच शुरू

Jun 23, 2025 - 18:07
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वाराणसी-प्रयागराज नेशनल हाइवे के लाला नगर टोल प्लाजा पर 62.87 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर, जांच शुरू
फोटो: लाला नगर टोल प्लाजा

वाराणसी-प्रयागराज नेशनल हाइवे (एनएच-19) पर स्थित लाला नगर टोल प्लाजा के संचालन में 62.87 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क घोटाले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस मामले में दिल्ली की कंपनी काशी टोलवे प्राइवेट लिमिटेड पर गंभीर आरोप लगे हैं। भदोही जिले के जिलाधिकारी शैलेश कुमार ने इस घोटाले की जांच शुरू कर दी है, और कंपनी के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। यह घटना उत्तर प्रदेश में टोल प्लाजा संचालन में हो रही अनियमितताओं का एक और उदाहरण बनकर सामने आई है। 

घोटाले का विवरण

काशी टोलवे प्राइवेट लिमिटेड को वाराणसी और प्रयागराज के बीच एनएच-19 के 72 किलोमीटर लंबे हिस्से पर टोल वसूलने का अधिकार 15 साल के लिए दिया गया था। इस अनुबंध का कुल मूल्य 3144 करोड़ रुपये था। स्टांप अधिनियम के अनुसार, इस तरह के अनुबंध को लीज (पट्टा) माना जाता है, जिसके लिए अनुबंध मूल्य का 2 प्रतिशत स्टांप शुल्क देना अनिवार्य होता है। इस हिसाब से कंपनी को 62.87 करोड़ रुपये का स्टांप शुल्क जमा करना चाहिए था। हालांकि, कंपनी ने इसे एक सामान्य अनुबंध के तहत पंजीकृत कराया और मात्र 100 रुपये का स्टांप शुल्क देकर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया।

कैसे सामने आया मामला?

यह घोटाला तब उजागर हुआ जब भदोही के एआईजी रजिस्ट्रेशन पंकज सिंह ने इस अनुबंध की जांच की। जांच में पता चला कि कंपनी ने 18 मार्च, 2023 को इस टोल संचालन के लिए एक पट्टा समझौता किया था, लेकिन इसे सामान्य अनुबंध के रूप में पंजीकृत कराकर स्टांप शुल्क की चोरी की। इस अनियमितता के कारण राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

जांच और कार्रवाई

भदोही के जिलाधिकारी शैलेश कुमार ने अक्टूबर 2024 में मुख्य सचिव के निर्देशों के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि कंपनी ने जानबूझकर स्टांप शुल्क नियमों का उल्लंघन किया। इसके बाद काशी टोलवे प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई और मुकदमा दर्ज किया गया। जांच अभी जारी है, और यह देखना बाकी है कि इस मामले में दोषियों को सजा मिलती है या नहीं।

व्यापक प्रभाव

यह घोटाला उत्तर प्रदेश में टोल प्लाजा संचालन में बार-बार सामने आने वाली अनियमितताओं को रेखांकित करता है। सरकारी राजस्व को होने वाला यह नुकसान न केवल आर्थिक रूप से चिंताजनक है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि ऐसी कंपनियों पर निगरानी और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाए। 

लाला नगर टोल प्लाजा घोटाला एक गंभीर मामला है, जिसमें काशी टोलवे प्राइवेट लिमिटेड ने स्टांप शुल्क में हेराफेरी कर सरकारी खजाने को 62.87 करोड़ रुपये का चूना लगाया। जिलाधिकारी शैलेश कुमार की अगुवाई में चल रही जांच से उम्मीद है कि इस घोटाले के सभी पहलुओं का खुलासा होगा और दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। यह घटना सरकार और जनता के लिए एक सबक है कि टोल संचालन जैसे बड़े अनुबंधों में पारदर्शिता और नियमों का पालन कितना जरूरी है।

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